Oil India ने सरकार के 'समुद्र मंथन' कार्यक्रम के तहत डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर एक्सप्लोरेशन के लिए अगले तीन वर्षों में **₹15,000 करोड़** के निवेश का ऐलान किया है। कंपनी अब अंडमान जैसे फ्रंटियर बेसिन पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन रूस में फंसे **$300 मिलियन** के डिविडेंड निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
बड़े विस्तार की तैयारी
Oil India लिमिटेड अब अपने पारंपरिक ऑनशोर कामकाज से आगे बढ़कर ऑफशोर एसेट्स की ओर कदम बढ़ा रही है। कंपनी ने 48,000 वर्ग किलोमीटर का बड़ा क्षेत्र हासिल किया है, जिसमें कृष्णा-गोदावरी, महानदी, अंडमान और केरल-कोंकण बेसिन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अब तेजी से भूकंपीय डेटा (seismic data) का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि ड्रिलिंग के लिए सबसे सटीक जगह चुनी जा सके।
अंडमान में मिली सफलता की किरण
ऑपरेशनल फ्रंट पर अच्छी खबर यह है कि अंडमान बेसिन में कंपनी को बड़ी कामयाबी मिली है। वहां मौजूद Sri Vijayapuram-2 और Sri Vijayapuram-3 कुओं में नेचुरल गैस के संकेत मिले हैं। अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो कंपनी के घटते हुए ऑनशोर रिजर्व की भरपाई आसानी से हो सकेगी।
रूस में फंसी 'रकम' का पेच
कंपनी के लिए एक चुनौती भी है। रूस में हुए निवेश से मिले करीब $300 मिलियन के डिविडेंड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मॉस्को शाखा में फंस गए हैं। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों (Western sanctions) की वजह से यह पैसा अभी कंपनी तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि मैनेजमेंट समाधान निकालने में जुटा है, लेकिन समयसीमा अभी साफ नहीं है, जिसका सीधा असर कंपनी की लिक्विडिटी पर पड़ रहा है।
भविष्य की राह
कंपनी का फोकस अब क्लीन एनर्जी की ओर भी है, जिसके लिए Oil Green Energy Limited नाम की सब्सिडियरी बनाई गई है। निवेशकों को कंपनी के इस बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर और रूसी फंड की रिकवरी पर खास नजर रखनी होगी, क्योंकि यही चीजें कंपनी के लॉन्ग-टर्म रिटर्न को तय करेंगी।
