Oil India Limited (OIL) अब देश में क्रूड ऑयल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए डीप-वॉटर और ऑफशोर एक्सप्लोरेशन पर फोकस बढ़ा रही है। कंपनी नई टेक्नोलॉजी के जरिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में है।
घरेलू उत्पादन पर जोर
शिलॉन्ग में आयोजित 'इंडिया एनर्जी वीक 2027' के कर्टेन रेजर इवेंट में कंपनी के फाइनेंस लीडरशिप ने साफ किया है कि एनर्जी सिक्योरिटी के लिए अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना जरूरी है। कंपनी डेटा-ड्रिवेन सिस्मिक एनालिसिस और एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उन अंडरयूटिलाइज्ड एनर्जी रिसोर्सेज को टैप करना चाहती है जो अब तक अनछुए रहे हैं।
'समुद्र मंथन' और भविष्य की रणनीति
कंपनी की नई रणनीति के केंद्र में 'समुद्र मंथन' जैसे इनिशिएटिव्स हैं। इसका मुख्य मकसद भारत को क्रूड ऑयल का नेट इंपोर्टर (Net Importer) बनाने के बजाय खुद को आत्मनिर्भर बनाना है। यह कदम ग्लोबल सप्लाई चेन में होने वाली उठा-पटक और जियोपॉलिटिकल रिस्क से बचने के लिए भी बेहद अहम है।
निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि डीप-वॉटर और ऑफशोर साइट्स पर काम करना काफी महंगा और जोखिम भरा होता है। इसमें भारी-भरकम कैपिटल खर्च (Capex) की जरूरत होती है। हालांकि, अगर यहां बड़े रिजर्व मिलते हैं, तो यह भविष्य में कंपनी की वैल्यूएशन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। फिलहाल ONGC के मुकाबले OIL का यह कदम सेक्टर के बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। आने वाले समय में प्रोजेक्ट्स के बजट एलोकेशन और एग्जीक्यूशन माइलस्टोन्स पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
