Oil India अब विदेशी बाजार में तेल और गैस की उत्पादक संपत्तियों को खरीदने की तैयारी कर रही है ताकि रेवेन्यू में स्थिरता बनी रहे। कंपनी ने 'समुद्र मंथन' मिशन के तहत घरेलू एक्सप्लोरेशन के लिए **₹15,000 करोड़** का निवेश तय किया है।
विदेशी संपत्तियों पर फोकस
Oil India अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव ला रही है। कंपनी का लक्ष्य अब ऐसी ऑयल और गैस संपत्तियों को खरीदना है जो पहले से उत्पादन कर रही हैं। इससे कंपनी को तुरंत कैश फ्लो मिलने लगेगा, जिससे नए ड्रिलिंग प्रोजेक्ट्स में लगने वाले लंबे समय और जोखिम को संतुलित किया जा सकेगा। फिलहाल कंपनी 10 विदेशी प्रोजेक्ट्स में 7 देशों में मौजूद है, जिसमें रूस और वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं।
घरेलू मोर्चे पर भारी निवेश
अंतरराष्ट्रीय विस्तार के बावजूद कंपनी का मुख्य आधार भारत ही है। मैनेजमेंट ने OALP (Open Acreage Licensing Policy) के तहत आक्रामक एक्सप्लोरेशन के लिए ₹15,000 करोड़ का फंड रखा है। यह प्रयास सरकार के 'समुद्र मंथन' मिशन द्वारा समर्थित है, जो डीप-वॉटर बेसिन में ड्रिलिंग के लिए डेटा मुहैया करा रहा है।
वित्तीय स्थिति और चुनौतियां
वित्तीय रूप से कंपनी मजबूत स्थिति में है। FY26 में कंपनी ने ₹7,551 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। वहीं, इसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.27x है, जो इसे विस्तार के लिए जरूरी फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी देता है।
फिलहाल, 14 अक्टूबर 2026 तक कंपनी के शेयर ₹447 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। मार्केट में विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण स्टॉक पर दबाव दिख रहा है। इसके अलावा, विदेशी संपत्तियों में काम करने से जुड़ी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और बोर्ड कंपोजिशन जैसे रेगुलेटरी मुद्दे भी निवेशकों की नजर में रहेंगे।
