सुप्रीम कोर्ट ने Oil India को डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क के पास अपने 'एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग' (ERD) प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा याचिका वापस लेने और नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है। असम के इन अहम रिजर्व्स तक पहुंच बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, हालांकि अभी भी प्रोजेक्ट को सख्त रेगुलेटरी और पर्यावरणीय जांच का सामना करना पड़ रहा है।
कानूनी दांव और असम प्रोजेक्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी तेल कंपनी Oil India को अपनी पुरानी लीगल एप्लीकेशन वापस लेकर नए सिरे से याचिका दाखिल करने की छूट दे दी है। यह पूरा मामला कंपनी के उस 'एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग' (ERD) प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जो असम के डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क के नीचे मौजूद तेल और गैस के भंडार तक पहुंचने के लिए प्रस्तावित है।
क्यों फंसा है पेंच?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पहले लैंड डायवर्जन की मांग को खारिज कर दिया था। मंत्रालय का तर्क 2023 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर आधारित है जो नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरीज में माइनिंग पर रोक लगाता है। दूसरी ओर, Oil India का दावा है कि उनकी ERD तकनीक को पारंपरिक माइनिंग नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि उनका इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से प्रोटेक्टेड जोन के बाहर है और वे 4,000 मीटर गहराई तक क्षैतिज (horizontally) ड्रिलिंग करते हैं।
कंपनी की ग्रोथ और वित्तीय स्थिति
यह प्रोजेक्ट कंपनी के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे भारत की कुल तेल मांग का लगभग 3% हिस्सा पूरा होने की उम्मीद है। कंपनी की फाइनेंशियल हालत की बात करें तो, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसने ₹2,870.21 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 60.35% अधिक है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स
हालांकि कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- रेगुलेटरी बाधाएं: पर्यावरणीय कानूनों की सख्त व्याख्या के चलते प्रोजेक्ट की राह अभी भी आसान नहीं है।
- कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex): कंपनी अपने FY27 बजट का लगभग 37% हिस्सा एक्सपेंशन पर खर्च कर रही है, जो फ्री कैश फ्लो को प्रभावित कर सकता है।
- सेफ्टी रिकॉर्ड: बाघजान (Baghjan) में 2020 में हुई दुर्घटना के चलते कंपनी का पुराना सेफ्टी रिकॉर्ड अक्सर चर्चा में रहता है, जिस पर पर्यावरण प्रेमियों की कड़ी नजर बनी रहती है।
आने वाले समय में कंपनी की नई याचिका की प्रोग्रेस और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव ही इस प्रोजेक्ट की दिशा तय करेंगे।
