सरकारी कंपनी Oil India ने कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में नेचुरल गैस की बड़ी खोज की है। कंपनी को यहाँ रोजाना **2,00,000 SCMD** (Standard Cubic Metres per Day) का पीक फ्लो मिला है, जो कंपनी के प्रोडक्शन प्लान के लिए एक बड़ा बूस्ट है।
खोज का पूरा गणित
Oil India ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन के KG-DSF/GSKW/2018 ब्लॉक में Matsyapuri फॉर्मेशन के भीतर यह सफलता हासिल की है। इस ब्लॉक को कंपनी ने सरकार की 'डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स' (Discovered Small Fields) नीलामी प्रक्रिया के दौरान हासिल किया था।
16 अक्टूबर, 2026 को Godavari-1 अप्रेजल वेल में टेस्टिंग शुरू की गई थी। टेस्टिंग के दौरान 2,00,000 SCMD गैस के अलावा लगभग 170 बैरल कंडेनसेट भी मिला है, जो कि एक तरह का लिक्विड हाइड्रोकार्बन है।
भारत के एनर्जी लक्ष्य के लिए क्यों है अहम?
भारत सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक देश के एनर्जी मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी मौजूदा 6% से बढ़ाकर 15% तक पहुंचाई जाए। इस तरह की खोज से देश की आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू स्तर पर एनर्जी प्रोडक्शन बढ़ेगा।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
एक बड़ा डिस्कवरी होना निश्चित रूप से अच्छी खबर है, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि खोज से लेकर कमर्शियल प्रोडक्शन तक का सफर लंबा होता है। इसमें भारी कैपिटल खर्च (Capital Spending) की जरूरत होती है। अभी यह साफ नहीं है कि गैस का फ्लो लंबे समय तक बरकरार रहेगा या नहीं और रिजर्व का कुल साइज क्या है। कंपनी फिलहाल उस क्षेत्र के ऊपरी हिस्सों (Higher Zones) का भी मूल्यांकन कर रही है, जिसके बाद ही कमर्शियल प्रोडक्शन की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
