Oil Giants का Q2 Profit ₹45 Billion के पार, जलवायु बहस तेज

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AuthorNeha Patil|Published at:
Oil Giants का Q2 Profit ₹45 Billion के पार, जलवायु बहस तेज

छह बड़ी ग्लोबल एनर्जी कंपनियों का वित्तीय वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में संयुक्त मुनाफा करीब ₹45 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह ऐसे समय में आया है जब एक नई रिपोर्ट ने इन फर्मों के ऐतिहासिक उत्सर्जन को बढ़ते ग्लोबल तापमान से जोड़ा है, जिससे कॉरपोरेट पर्यावरण जिम्मेदारी और ऊर्जा मांग के बीच बहस और तेज हो गई है।

ऑयल कंपनियों के मुनाफे में बड़ा उछाल

ग्लोबल एनर्जी सेक्टर इस वक्त बंपर कमाई कर रहा है। BP, Chevron, Eni, ExxonMobil, Shell और TotalEnergies जैसी छह बड़ी तेल और गैस कंपनियों का अप्रैल-जून 2026 तिमाही का कुल मुनाफा लगभग $45 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह पिछले तिमाही के $23 अरब डॉलर के मुनाफे से लगभग दोगुना है। इस भारी उछाल की मुख्य वजह इस तिमाही के दौरान तेल की ऊंची कीमतें रही हैं।

पर्यावरण पर असर और उत्सर्जन का विश्लेषण

Oxfam की एक हालिया रिपोर्ट ने इन कंपनियों के काम और पर्यावरण के बीच के रिश्ते पर रोशनी डाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन छह फर्मों की वजह से 2025 में लगभग $60 अरब डॉलर का पर्यावरणीय नुकसान हुआ है। उत्सर्जन डेटा का विश्लेषण करते हुए, रिपोर्ट से पता चलता है कि इन एनर्जी दिग्गजों के ऐतिहासिक उत्पादन ने 2000 से 2023 के बीच आई लगभग 25% हीटवेव को बढ़ाने में योगदान दिया है। ये नतीजे कार्बन डाइऑक्साइड के कुल उत्सर्जन और भयानक मौसमी घटनाओं की आवृत्ति के बीच संबंध को लेकर चल रहे वैज्ञानिक शोध से मेल खाते हैं।

ज़िम्मेदारी पर वैज्ञानिक राय

हालांकि वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि ग्लोबल तापमान में वृद्धि के पीछे कुल उत्सर्जन एक प्रमुख कारण है, कंपनियों की ज़िम्मेदारी का मुद्दा अभी भी जटिल चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां तेल और गैस कंपनियां उत्सर्जन में बड़ा योगदान देती हैं, वहीं कोयला उत्पादन, खेती, औद्योगिक निर्माण और ग्लोबल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अन्य क्षेत्र भी जलवायु समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, मार्केट एनालिस्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि ऊर्जा उत्पादों की लगातार बनी हुई ग्लोबल मांग इन उत्सर्जनों को पैदा करने वाले उत्पादन स्तरों को बढ़ावा दे रही है, जिससे ज़िम्मेदारी का दायरा उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों तक फैल रहा है।

एनर्जी ट्रांज़िशन और भविष्य के निवेश

जैसे-जैसे ये कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, निवेशकों का ध्यान इस बात पर केंद्रित हो रहा है कि इन पैसों का इस्तेमाल शेयरधारकों को रिटर्न देने और क्लीन एनर्जी सोर्स की ओर ट्रांज़िशन के बीच कैसे किया जाएगा। कई बड़ी तेल और गैस कंपनियों ने मीथेन लीकेज कम करने और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स, जैसे कि सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजीगत खर्च बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत में ONGC और Indian Oil Corporation जैसी कंपनियां भी इसी तरह के रिन्यूएबल लक्ष्यों और क्लीन एनर्जी पहलों के साथ अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला रही हैं।

हालांकि, इंडस्ट्री में एक तनाव बना हुआ है। स्थिरता के घोषित लक्ष्यों के बावजूद, अनुमान बताते हैं कि ये प्रमुख कंपनियां 2030 तक तेल और गैस उत्पादन में 14% की वृद्धि करने की योजना बना रही हैं। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या ये कंपनियां कम कार्बन वाली तकनीक में अपने निवेश की गति बनाए रखेंगी या अल्पकालिक लाभ को अधिकतम करने के लिए पारंपरिक जीवाश्म ईंधन उत्पादन को प्राथमिकता देंगी। वर्तमान लाभ मार्जिन बनाए रखने और दीर्घकालिक एनर्जी ट्रांज़िशन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के बीच संतुलन इस सेक्टर के भविष्य के दृष्टिकोण के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.