भू-राजनीतिक तनाव के बीच OPEC+ का बड़ा कदम
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संभावित सप्लाई बाधाओं के डर के बीच, OPEC+ समूह कच्चे तेल (Crude Oil) के प्रोडक्शन में बड़ी बढ़ोतरी करने पर विचार कर रहा है। यह बढ़ोतरी 411,000 बैरल प्रति दिन तक हो सकती है, जो पहले प्रस्तावित 200,000 बैरल से काफी ज्यादा है। इस खबर से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं, Brent क्रूड $73 प्रति बैरल के निशान के करीब पहुंच गया है।
जानिए क्यों हो रहा है प्रोडक्शन बढ़ाने पर विचार?
वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में $4 से $10 प्रति बैरल का 'रिस्क प्रीमियम' जुड़ गया है। हाल ही में ईरान पर हुए हमलों के बाद, शिपिंग लेन जैसे कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज (Strait of Hormuz) में सप्लाई रुकने की चिंता बढ़ गई है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20-30% तेल और LNG गुजरता है।
इस स्थिति से निपटने के लिए, सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने फरवरी 2026 में अपना प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट बढ़ाकर 7.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंचा दिया है, जो अप्रैल 2023 के बाद का सबसे बड़ा स्तर है। इसी तरह, UAE का अबू धाबी (Abu Dhabi) भी अप्रैल में अपने मूरबन क्रूड (Murban crude) का एक्सपोर्ट बढ़ाने वाला है।
OPEC+ देशों की रविवार को होने वाली मीटिंग में उत्पादन लक्ष्य तय किए जाएंगे। इस मीटिंग में 411,000 bpd की बढ़ोतरी पर सहमति बन सकती है, जिससे प्रोडक्शन बढ़ाने पर लगी तीन महीने की रोक (जनवरी से मार्च 2026) खत्म हो जाएगी।
बाजार का विश्लेषण और आगे क्या?
हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव कीमतों को बढ़ा रहा है, लेकिन लॉन्ग-टर्म (long-term) के लिए सप्लाई-डिमांड (supply-demand) का समीकरण थोड़ा अलग तस्वीर पेश कर रहा है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) का अनुमान है कि 2026 में Brent क्रूड का औसत भाव $58/b रहेगा, जो 2025 के $69/b से कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि 2026 में ग्लोबल ऑयल इन्वेंट्री (global oil inventory) बढ़ने की उम्मीद है।
EIA के मुताबिक, 2026 में नॉन-OPEC+ देशों, खासकर अमेरिका, कनाडा, ब्राजील और अर्जेंटीना से सप्लाई में करीब 2.5 मिलियन b/d की बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका का क्रूड आउटपुट 2026 में 13.58 मिलियन bpd रहने का अनुमान है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) तक 4.5 मिलियन b/d का सरप्लस (अतिरिक्त सप्लाई) हो सकता है। ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ (global economic growth) करीब 3.1% रहने का अनुमान है, जो तेल की डिमांड को थोड़ा धीमा कर सकता है।
विश्लेषकों की राय (Analyst View)
कुछ एनालिस्ट्स (analysts) का मानना है कि ईरान के साथ तनाव भले ही कुछ समय के लिए कीमतों को बढ़ाए, लेकिन आखिरकार फोकस सप्लाई की अधिकता पर ही लौटेगा। जूलियस बेयर (Julius Baer) के नॉर्बर्ट रकर (Norbert Rucker) कहते हैं कि तनाव खत्म होने के बाद सप्लाई का दबाव कीमतों पर बना रहेगा।
IEA का अनुमान है कि 2026 में तेल की डिमांड 850 kb/d बढ़ेगी, जिसमें चीन जैसे नॉन-OECD देशों का बड़ा योगदान होगा। OPEC+ ग्रुप, जो दुनिया का करीब 40% तेल सप्लाई करता है, 2026 तक करीब 3.66 मिलियन bpd की कटौती जारी रखेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये कदम सप्लाई की अधिकता की चिंता को कैसे संतुलित करते हैं।
