ONGC ने वेनेजुएला के अपने ठप पड़े San Cristobal ऑयलफील्ड को फिर से शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी मंजूरी मिलने के बाद कंपनी वहां **$20 करोड़** का निवेश करेगी, जिससे वर्षों से अटके **$50 करोड़** के डिविडेंड (Dividend) की वसूली की उम्मीद जगी है।
सरकारी तेल कंपनी ONGC अपनी ओवरसीज आर्म, ONGC Videsh Ltd (OVL) के जरिए वेनेजुएला में एक बड़ा दांव खेलने जा रही है। कंपनी वहां के San Cristobal ऑयलफील्ड में $20 करोड़ का निवेश करेगी। इस फंड का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने और तेल उत्पादन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए किया जाएगा।
क्यों मिला ग्रीन सिग्नल?
यह सारा खेल जुलाई 2026 में मिली एक खास अमेरिकी मंजूरी (US Treasury’s OFAC लाइसेंस) से शुरू हुआ। इस लाइसेंस ने वर्षों से चले आ रहे प्रतिबंधों के कारण बंद पड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस कदम से ONGC को वेनेजुएला में फंसे हुए $50 करोड़ से ज्यादा के डिविडेंड वापस पाने की उम्मीद है।
पार्टनर की मुसीबत, ONGC का सहारा
इस प्रोजेक्ट में ONGC की 40% हिस्सेदारी है, जबकि वहां की सरकारी कंपनी Petroleos de Venezuela SA (PDVSA) के पास 60% हिस्सा है। चूंकि वेनेजुएला की कंपनी फंड की कमी से जूझ रही है, इसलिए ONGC पूरे $20 करोड़ का निवेश खुद करेगी और बाद में भविष्य के तेल उत्पादन से इसकी भरपाई करेगी।
रिस्क और सावधानी
हालांकि यह खबर पॉजिटिव है, लेकिन ONGC ने निवेशकों को आगाह किया है कि अभी काम शुरुआती दौर में है। 18 अगस्त 2026 को एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने साफ किया कि अभी एग्रीमेंट पर बातचीत चल रही है, इसलिए इसका कोई बड़ा फाइनेंशियल इम्पैक्ट अभी तय नहीं किया जा सकता। जियो-पॉलिटिकल रिस्क और वहां की खराब होती इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी बड़े चैलेंज बने हुए हैं।
