अमेरिकी नियामक मंजूरी के बाद ONGC Videsh अब वेनेजुएला में अपनी तेल परियोजनाओं को फिर से पटरी पर ला रही है। कंपनी सैन क्रिस्टोबल फील्ड में **$200 मिलियन** का निवेश करने की तैयारी में है ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके, साथ ही फंसे हुए **$500 मिलियन** के डिविडेंड की वसूली पर भी जोर दिया जा रहा है।
ONGC की इंटरनेशनल आर्म, ONGC Videsh (OVL) ने वेनेजुएला में अपने ठप पड़े प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। अमेरिकी सरकार के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) से जुलाई 2026 में मिले लाइसेंस के बाद यह रास्ता साफ हो गया है।
ऑपरेशन्स और निवेश की योजना
कंपनी फिलहाल अपने दो मुख्य एसेट्स - सैन क्रिस्टोबल और काराबोबो-1 पर ध्यान केंद्रित कर रही है। OVL की सैन क्रिस्टोबल में 40% और काराबोबो-1 में 11% हिस्सेदारी है। कंपनी अगले 12 महीनों में सैन क्रिस्टोबल फील्ड में $200 मिलियन का निवेश करेगी। इस खर्च का लक्ष्य उत्पादन को फिर से 45,000 से 50,000 बैरल प्रति दिन के स्तर तक पहुंचाना है।
डिविडेंड का फंसा पैसा
सबसे बड़ा फोकस $500 मिलियन के उन डिविडेंड्स पर है जो प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला में फंसे हुए हैं। OVL इसके समाधान के लिए वेनेजुएला सरकार और वहां की सरकारी तेल कंपनी Petróleos de Venezuela (PDVSA) के साथ बातचीत कर रही है। कंपनी कैश सेटलमेंट या क्रूड ऑयल की डिलीवरी के जरिए इस बकाया राशि को वसूलने की कोशिश कर रही है।
वेनेजुएला के नए 'ऑर्गेनिक हाइड्रोकार्बन लॉ' (Organic Hydrocarbons Law) ने टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाया है, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए वहां काम करना अब पहले से ज्यादा अनुकूल हो गया है। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और ऑपरेशनल चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
