सरकारी पॉलिसी का बूस्ट: मुनाफे की उम्मीद बढ़ी
सरकार की नई पॉलिसी ONGC के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। एनालिस्ट्स (Analysts) का अनुमान है कि FY27 में कंपनी के नेट प्रॉफिट (Net Profit) में करीब 5% की बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, सरकार ने ऑनशोर क्रूड ऑयल (Onshore Crude Oil) पर रॉयल्टी 20% से घटाकर 12.5% और ऑफशोर (Offshore) पर 9% से घटाकर 8% कर दी है। साथ ही, नेचुरल गैस (Natural Gas) पर भी रॉयल्टी दरें कम हुई हैं। इससे कंपनी की ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Cost) में सीधा फायदा होगा। हाई ऑयल प्राइस (High Oil Price) और कोई विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) न होने से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
नए प्रोजेक्ट्स से प्रोडक्शन में तेजी की आस
KG-98/2 और Daman Upside जैसे बड़े ऑफशोर प्रोजेक्ट्स (Offshore Projects) के चालू होने से अगले कुछ सालों में प्रोडक्शन (Production) बढ़ने की उम्मीद है। इन प्रोजेक्ट्स से Q1 FY27 से नई गैस सप्लाई शुरू होने का अनुमान है, जो पूरे साल धीरे-धीरे बढ़ेगी। इसी का नतीजा है कि ONGC का शेयर ₹294.50 के आसपास ट्रेड कर रहा है और अपने ₹307.50 के 52-हफ्ते के हाई (52-week High) को छूने के करीब है।
वैल्यूएशन आकर्षक, पर कॉम्पिटिशन है तगड़ा
देश के अपस्ट्रीम ऑयल सेक्टर (Upstream Oil Sector) में ONGC का दबदबा कायम है। 2025 तक, यह कुल घरेलू क्रूड उत्पादन (Crude Output) का करीब 68% और नेचुरल गैस (Natural Gas) का 70% हिस्सा रखती है। लेकिन, कंपनी का वैल्यूएशन (Valuation) काफी आकर्षक लग रहा है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो फिलहाल 9.77 के आसपास है, जो इंडस्ट्री एवरेज 13.32 से काफी कम है। यह ₹3.70 ट्रिलियन की मार्केट कैप (Market Cap) वाली एक लार्ज-कैप (Large-cap) कंपनी के लिए सस्ता माना जा सकता है। हालांकि, भारतीय ऑयल एंड गैस सेक्टर (Oil & Gas Sector) मुश्किल आर्थिक दौर से गुजर रहा है। Moody's ने हाल ही में भारत की 2026 की आर्थिक ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6% कर दिया है, जिसका कारण हाई एनर्जी कॉस्ट (High Energy Cost) और इंपोर्ट पर निर्भरता है। Reliance Industries जैसी कंपनियां डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन (Deepwater Exploration) में लीड ले रही हैं, जो ONGC के लिए बड़ी चुनौती है। एनालिस्ट्स (Analysts) की राय भी बंटी हुई है, जिनके टारगेट प्राइस (Target Price) में भारी अंतर है।
प्रोडक्शन की दिक्कतें और फाइनेंशियल रिस्क
पॉलिसी के फायदे और नए प्रोजेक्ट्स के बावजूद, ONGC के लिए प्रोडक्शन ग्रोथ (Production Growth) बढ़ाना एक बड़ी चिंता बनी हुई है। पुराने फील्ड्स से उत्पादन लगातार घट रहा है और लक्ष्य अक्सर चूके हैं। कंपनी की एक्सप्लोरेशन (Exploration) एक्टिविटीज में अक्सर महंगे ड्राई वेल (Dry Well) पाए जाते हैं, जिससे भारी राइट-ऑफ (Write-off) का बोझ पड़ता है। अकेले Q3 FY26 में ऐसे राइट-ऑफ ₹2,050 करोड़ के थे, जो अनुमान से कहीं ज्यादा थे और नतीजों पर भारी पड़े। ONGC का बिजनेस एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन पर बहुत निर्भर है, जिससे यह ऑयल प्राइस (Oil Price) और जियोलॉजिकल रिस्क (Geological Risk) के प्रति बहुत सेंसेटिव (Sensitive) है। करीब ₹1,760.18 बिलियन के भारी कर्ज (Debt) ने इस कमजोरी को और बढ़ाया है। साथ ही, घरेलू बाजार में दबदबा होने के बावजूद, ONGC Videsh को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से टक्कर लेनी पड़ रही है, जिनके पास ज्यादा फंड और बेहतर टेक्नोलॉजी है।
आगे का रास्ता: एनालिस्ट्स की राय बंटी
आगे देखें तो ONGC ने FY27 के लिए 42.5 मिलियन टन ऑयल और गैस प्रोडक्शन (Oil & Gas Production) का लक्ष्य बरकरार रखा है। कंपनी का बोर्ड 26 मई, 2026 को वित्तीय नतीजों (Financial Results) और फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) की सिफारिश पर विचार के लिए बैठक करेगा। हालांकि, एनालिस्ट्स (Analysts) की राय में बड़ा अंतर यह दर्शाता है कि बाजार पॉलिसी बदलावों से लागत में होने वाले फायदों और कंपनी के ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन (Operational Execution) के जोखिमों के बीच संतुलन बना रहा है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, एक आम सहमति वाला टारगेट प्राइस (Consensus Target Price) करीब ₹275 है, जो कुछ एनालिस्ट्स के लिए सीमित बढ़त का संकेत देता है। वहीं, कुछ अन्य कमोडिटी कीमतों और प्रोडक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीदों के आधार पर ऊंची कीमतों की उम्मीद कर रहे हैं।
