सरकारी बड़ा ऐलान, ONGC के शेयर रॉकेट!
मंगलवार, 12 मई, 2026 को Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के शेयरों में तूफानी तेजी आई। शेयर 6.5% तक उछलकर ₹298.95 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए। इस उछाल की मुख्य वजह सरकार का वो ऐलान है, जिसमें घरेलू तेल और गैस उत्पादन पर रॉयल्टी की दरें काफी कम कर दी गई हैं।
अब ऑनशोर (Onshore) कच्चे तेल पर रॉयल्टी 16.66% से घटकर 10% कर दी गई है, जबकि ऑफशोर (Offshore) कच्चे तेल के लिए यह 9.09% से घटकर 8% हो गई है। इस बड़े बदलाव से अपस्ट्रीम कंपनियों, खासकर ONGC और Oil India Ltd, की कमाई (Profit) और कैश फ्लो (Cash Flow) में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
जिस दिन ONGC के शेयर चढ़े, उस दिन बाजार में गिरावट थी। BSE Sensex करीब 0.70% नीचे था, लेकिन ONGC ने शानदार प्रदर्शन किया। शेयरों में जोरदार खरीददारी देखी गई, करीब 3.61 करोड़ शेयर ट्रेड हुए।
बाजार की नजरें अब 26 मई, 2026 को होने वाली कंपनी की बोर्ड मीटिंग पर हैं, जहाँ Q4FY26 के नतीजे और डिविडेंड (Dividend) पर फैसला होगा। लेकिन अभी के लिए, रॉयल्टी दरों में कमी का असर नतीजों पर हावी दिख रहा है।
वैल्यूएशन और सेक्टर पर नजर
सरकार की ओर से रॉयल्टी दरों में कटौती को ONGC और Oil India Ltd जैसी कंपनियों के लिए एक बड़ा स्ट्रक्चरल (Structural) पॉजिटिव बदलाव माना जा रहा है। इससे उनकी इकोनॉमिक्स (Economics) सीधे तौर पर बेहतर होगी।
फिलहाल, ONGC का P/E रेश्यो 8.31 से 9.96 के बीच है और मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) करीब ₹3.4 से ₹3.7 ट्रिलियन है। वहीं, Oil India Ltd का P/E 11.9-13.22 और Reliance Industries का 21.38-24.07 है। इन कंपनियों की तुलना में ONGC काफी आकर्षक वैल्यूएशन (Valuation) पर नजर आ रहा है, खासकर रॉयल्टी कट से मिलने वाले अतिरिक्त फायदे को देखते हुए।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का ONGC में भरोसा बढ़ा है। मार्च 2026 तक उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 7.97% हो गई थी, जो पिछले क्वार्टर में 7.43% थी। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 58.89% पर स्थिर रही।
भारत का तेल और गैस सेक्टर (Oil & Gas Sector), जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है, भविष्य में लगातार ग्रोथ के लिए तैयार है। अगले दशक में इसकी मांग में बड़ी बढ़ोतरी का अनुमान है। यह व्यापक आर्थिक तस्वीर ONGC के लॉन्ग-टर्म आउटलुक (Long-term Outlook) को मजबूती देती है, खासकर कंपनी के ऑफशोर प्रोडक्शन (Offshore Production) बढ़ाने पर फोकस को देखते हुए।
अभी भी कुछ चिंताएं बाकी
पॉजिटिव पॉलिसी बदलावों के बावजूद, कुछ रिस्क (Risk) बने हुए हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव, जैसे कि ब्रेंट क्रूड फिलहाल करीब $105 प्रति बैरल है, एक बड़ी चुनौती है। यह कम रॉयल्टी के फायदों को कम कर सकता है।
ONGC का प्रदर्शन सरकारी नीतियों पर काफी निर्भर करता है, और भविष्य में किसी भी बदलाव या टैक्सेशन (Taxation) में फेरबदल की संभावना बनी रहती है। एनालिस्ट (Analyst) के टारगेट प्राइस में भी काफी अंतर है - CLSA ने ₹405 का टारगेट दिया है, जबकि Goldman Sachs ने ₹205 पर 'Sell' रेटिंग दी है। यह अनिश्चितता कंपनी के लॉन्ग-टर्म एग्जीक्यूशन (Execution) और वैल्यूएशन को लेकर है।
हालांकि स्टॉक पर 4.57%-5.44% का अच्छा डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) मिल रहा है, लेकिन ऐतिहासिक तौर पर ONGC के डिविडेंड पेमेंट में उतार-चढ़ाव रहा है। निवेशकों को इंपोर्ट (Import) पर ONGC की निर्भरता और रुपया (Rupee) के कमजोर होने की चिंता को भी ध्यान में रखना चाहिए। डीपवाटर एक्सप्लोरेशन (Deepwater Exploration) में संभावित देरी जैसे ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risks) भी प्रोडक्शन ग्रोथ को लगातार बनाए रखने में चुनौती पेश कर सकते हैं।
आगे क्या उम्मीदें?
एनालिस्ट्स (Analysts) का ONGC के शेयर के लिए औसत टारगेट प्राइस करीब ₹343.33 है। यह मौजूदा स्तरों से 22% से ज्यादा का पोटेंशियल अपसाइड (Potential Upside) दिखाता है। हालांकि, यह औसत अलग-अलग फर्मों के टारगेट प्राइस के बड़े अंतर को छुपाता है।
कंपनी से FY26 से FY28 के बीच तेल और गैस उत्पादन में सालाना ग्रोथ की उम्मीद है। इसकी वजह नए ऑफशोर डेवलपमेंट (Offshore Development) और प्रमुख फील्ड्स का री-डेवलपमेंट (Redevelopment) है। रॉयल्टी कट से बेहतर हुई इकोनॉमिक्स (Economics) ग्रोथ की उम्मीदों को और बढ़ा सकती है और लगातार डिविडेंड भुगतान को सपोर्ट कर सकती है। यह स्टॉक भारत के एनर्जी सेक्टर (Energy Sector) पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए एक अहम फोकस पॉइंट है।
