ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने असम के खोरघाट साइट पर अपनी नई गैस इवैक्यूएशन फैसिलिटी शुरू कर दी है। इस प्रोजेक्ट से नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड में रोज़ाना **1 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर** गैस की सप्लाई बढ़ेगी, जिसका मकसद फ्लैरिंग को कम करना और क्षेत्रीय मांग को पूरा करना है। कंपनी के स्टैंडअलोन मुनाफे में पिछली तिमाही में बड़ी बढ़त देखी गई है, लेकिन निवेशक कंसॉलिडेटेड नतीजों पर नज़र बनाए हुए हैं, जो रिफाइनिंग के घाटे और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हैं।
नॉर्थ-ईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने असम के गोलाघाट जिले में खोरघाट GGS-1 साइट पर एक नई गैस इवैक्यूएशन फैसिलिटी चालू की है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर से कंपनी रोज़ाना लगभग 1 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) अतिरिक्त गैस को नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड में प्रोसेस और सप्लाई कर सकेगी। जोरहाट एसेट को सीधे ग्रिड से जोड़ने से कंपनी का मकसद गैस फ्लैरिंग को कम करना और पूरे क्षेत्र में घरों व उद्योगों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाना है।
नॉर्थ-ईस्ट में सप्लाई नेटवर्क मजबूत
यह नई फैसिलिटी मौजूदा डेर्गाओं-डिमापुर पाइपलाइन को पूरक है, जिससे असम और नगालैंड जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए गैस सप्लाई नेटवर्क और मजबूत होगा। ONGC वर्तमान में जंतपाथर और कशोमारिगांव में अतिरिक्त हुक-अप फैसिलिटीज के साथ इस नेटवर्क का और विस्तार करने पर काम कर रही है, जिनसे और अधिक उत्पादक क्षेत्रों को नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड से जोड़ने की उम्मीद है। यह विस्तार नॉर्थ-ईस्ट में गैस-आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए मिली-जुली तस्वीर
निवेशकों के लिए, यह ऑपरेशनल विस्तार 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के मिले-जुले वित्तीय प्रदर्शन के साथ आता है। जहां ONGC के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 112% की बढ़ोतरी होकर ₹17,034 करोड़ रहा, वहीं कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 43% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण कंपनी के रिफाइनिंग और मार्केटिंग सेगमेंट में हुआ घाटा है। कंपनी का शेयर करीब ₹239-240 पर ट्रेड कर रहा है, जो मार्केट के उस सेंटिमेंट को दर्शाता है जो मजबूत अपस्ट्रीम प्रोडक्शन ग्रोथ को कंसॉलिडेटेड रिफाइनिंग मार्जिन और ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइस में अस्थिरता के साथ संतुलित कर रहा है।
आगे की चुनौतियां
तत्काल ऑपरेशनल लाभों से परे, यह क्षेत्र अनूठी पर्यावरणीय और सुरक्षा चुनौतियां भी पेश करता है, क्योंकि यह फैसिलिटीज़ सीस्मिक ज़ोन-V में संचालित होती हैं, जिसके लिए कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है। कंपनी की इन ऑपरेशनल जोखिमों का प्रबंधन करने और कंसॉलिडेटेड आय को स्थिर करने की क्षमता बाजार पर्यवेक्षकों के लिए रुचि का विषय बनी हुई है। जंतपाथर और कशोमारिगांव में आगामी हुक-अप परियोजनाओं की प्रगति अगले कुछ तिमाहियों में हितधारकों के लिए निगरानी का अगला प्रमुख मील का पत्थर होगी।
