मुनाफे में बंपर उछाल, पर गिरावट क्यों?
ONGC ने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22.6% बढ़कर ₹11,946 करोड़ हो गया। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों से बेहतर है। लेकिन, इन शानदार नंबर्स के बावजूद, ONGC के शेयर 3.75% तक गिर गए, जो निफ्टी 50 इंडेक्स के 0.9% के मुकाबले बड़ी गिरावट है।
प्रॉफिट के पीछे छिपी चिंताएं
इस मुनाफे की मुख्य वजहों में कंपनी की बढ़ी हुई 'अन्य आय' (other income) और टैक्स देनदारी में कमी शामिल है। हालांकि, असली तस्वीर तब सामने आती है जब हम कंपनी के ऑपरेशंस को देखते हैं। ONGC का रेवेन्यू (राजस्व) ₹1.67 लाख करोड़ पर लगभग सपाट रहा, जिसमें कोई खास बढ़ोतरी नहीं दिखी।
निवेशकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण ₹2,050 करोड़ का 'ड्राई वेल राइट-ऑफ' (dry well write-offs) है। यह अनुमानित ₹1,200 करोड़ से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि कंपनी ने कुएं खोदने पर काफी पैसा लगाया, लेकिन वहां तेल या गैस नहीं मिला, जिससे भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा, कच्चे तेल (crude oil) और गैस की कीमतों में भी गिरावट देखी गई, जिसने कंपनी की कमाई पर असर डाला।
डिविडेंड और आगे का रास्ता
इन सब के बीच, ONGC ने शेयरधारकों को खुश करने के लिए ₹6.25 प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) देने का ऐलान किया है। कंपनी का शेयर फिलहाल अपने पिछले बारह महीनों की कमाई (TTM earnings) के मुकाबले करीब 8.16 गुना पर ट्रेड कर रहा है।
साथियों से तुलना
ONGC की परफॉरमेंस को साथियों से तुलना करें तो इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) ने शानदार रिफाइनिंग मार्जिन के दम पर दमदार प्रॉफिट दिखाया। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) का रेवेन्यू 10.5% बढ़ा। ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) का स्टैंडअलोन प्रॉफिट 34% गिरा, लेकिन उसका कंसोलिडेटेड रिजल्ट स्थिर रहा।
एनालिस्ट क्या कहते हैं?
कुल 31 एनालिस्ट में से 18 ONGC पर 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, जबकि 7 इसे 'Hold' करने की सलाह दे रहे हैं। औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹276.58 है, जो मौजूदा स्तरों से मामूली बढ़त का संकेत देता है।
आगे का नजरिया
बाजार की नजर अब ONGC की अगली कमाई कॉल पर है, जहाँ कंपनी मैनेजमेंट से उम्मीद है कि वे इन ऑपरेशनल चुनौतियों से निपटने की रणनीति और भविष्य के उत्पादन (production) के बारे में जानकारी देंगे। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के ग्लोबल ट्रेंड को देखते हुए, कंपनी के लिए लागत नियंत्रण और बेहतर ऑपरेशनल परफॉरमेंस काफी अहम होगा।