सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का सिलसिला जारी है, जिसका असर ONGC के शेयरों पर भी देखने को मिला। सोमवार को ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) के शेयर **2.11%** गिरकर **₹243.50** पर आ गए।
Detailed Coverage
ONGC के शेयर क्यों गिरे?
आज शेयर बाजार में कमजोरी का माहौल है और इसी के चलते ONGC के शेयर्स में भी गिरावट आई। कंपनी के शेयर 2.11% टूटकर ₹243.50 के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। यह गिरावट व्यापक बाजार के रुझान के अनुरूप है, क्योंकि निवेशक बड़े-कैप शेयरों को प्रभावित करने वाली मौजूदा मैक्रोइकॉनॉमिक स्थितियों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
ONGC का वित्तीय प्रदर्शन
ONGC ने मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए ₹46,791.19 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Consolidated Net Profit) दर्ज किया है। वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) ₹662,247.32 करोड़ रहा, जो मार्च 2022 के ₹491,269.80 करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है।
हालांकि, नेट प्रॉफिट में उतार-चढ़ाव देखा गया है। 2022 में यह ₹47,830.13 करोड़ था, 2024 में बढ़कर ₹54,704.81 करोड़ हुआ और सबसे हालिया वित्तीय वर्ष (मार्च 2026) में यह ₹46,791.19 करोड़ रहा।
तिमाही नतीजों पर नजर डालें तो मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹173,805.19 करोड़ रहा। इस तिमाही में नेट प्रॉफिट ₹10,884.95 करोड़ रहा, जो सितंबर 2025 तिमाही के ₹12,274.96 करोड़ से कम है। कंपनी का रिटर्न ऑन नेट वर्थ (Return on Networth) 11.14% है।
कर्ज और कैपिटल एलोकेशन
ONGC का कर्ज-इक्विटी अनुपात (Debt-to-Equity Ratio) मार्च 2026 तक 0.38 है, जो कि काफी नियंत्रण में है। कंपनी का कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) रणनीति एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन में बड़े निवेश पर केंद्रित है। मार्च 2026 के लिए कंपनी ने निवेश गतिविधियों (Investing Activities) में ₹57,675 करोड़ खर्च किए हैं। इसमें हाल ही में 25 जुलाई 2026 को शुरू हुई म KMnO4नदी बेसिन में डीपवाटर वेल परियोजना और पुगा में जियोथर्मल एनर्जी (Geothermal Energy) का विकास शामिल है।
वैल्यूएशन और आगे क्या?
वर्तमान में ONGC का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 8.64 और प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो 0.96 है। कंपनी ने फरवरी 2026 में ₹6.25 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) भी घोषित किया था। ऊर्जा सेक्टर ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों और सरकारी नीतियों के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। निवेशकों की नजरें कंपनी के नए एक्सप्लोरेशन वेल्स के प्रदर्शन और सरकार द्वारा तय की जाने वाली तेल और गैस की कीमतों पर बनी रहेंगी।
