ONGC अपनी क्रूड प्रोक्योरमेंट को स्ट्रीमलाइन करने के लिए साल के अंत तक एक सेंट्रलाइज्ड ट्रेडिंग डेस्क शुरू कर रही है। साथ ही, कंपनी मंगलुरु में **1.75 मिलियन टन** का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) भी तैयार करेगी।
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने अपने ऑपरेशंस में बड़ा बदलाव करते हुए एक डेडिकेटेड क्रूड ट्रेडिंग डेस्क लॉन्च करने की तैयारी की है। 2026 के अंत तक चालू होने वाला यह डेस्क न केवल कंपनी की प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया को सेंट्रलाइज करेगा, बल्कि इससे हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) जैसी सहायक कंपनियों के साथ तालमेल बेहतर होगा। अनुमान है कि इससे कंपनी को सालाना लगभग $1 बिलियन का वैल्यू अनलॉक करने में मदद मिलेगी।
स्ट्रैटेजिक रिजर्व और फाइनेंशियल हाल
यह 1.75 मिलियन टन का स्ट्रैटेजिक रिजर्व पूरी तरह से ONGC के बैलेंस शीट पर आधारित होगा। यह प्रोजेक्ट भारत की कुल इमरजेंसी क्रूड स्टोरेज कैपेसिटी में 33% का इजाफा करेगा। जहां तक फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की बात है, Q1 FY27 में ONGC का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 112% बढ़कर ₹17,034 करोड़ रहा है। हालांकि, रिफाइनिंग बिजनेस में घाटे के कारण कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में 43% की गिरावट आई है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
प्रोडक्शन पर फोकस और भविष्य की योजनाएं
कंपनी 'प्रोजेक्ट डीप-एक्स' (Project DeepX) और 'मिशन समुद्र मंथन' के जरिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। 2031 तक 87 डीप-सी कुओं की ड्रिलिंग के लिए ₹1 लाख करोड़ का निवेश तय किया गया है। इसके अलावा, ONGC विदेश ने वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल फील्ड में ऑपरेशंस फिर से शुरू करने के लिए US OFAC से लाइसेंस भी हासिल कर लिया है।
जोखिम और निगरानी
इन बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ कैपिटल खर्च और टेक्निकल रिस्क जुड़े हुए हैं। निवेशकों को रिफाइनिंग सब्सिडियरीज की परफॉर्मेंस और ग्लोबल क्रूड कीमतों की अस्थिरता पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी।
