रेटिंग में गिरावट: ONGC के लिए खतरे की घंटी?
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने सरकारी ऑयल दिग्गज ONGC की रेटिंग को 'Buy' से घटाकर 'Accumulate' कर दिया है। इस कदम के पीछे कंपनी की प्रोडक्शन वॉल्यूम (Production Volume) को लगातार बढ़ाने और उसे बनाए रखने की क्षमता को लेकर चिंताएं हैं। साथ ही, क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों से होने वाली कमाई में कमी भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ONGC की ऑयल और गैस सेल्स वॉल्यूम में साल-दर-साल मामूली बढ़ोतरी (1.3% ऑयल और 1.1% गैस) दर्ज की गई है। हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले ऑयल वॉल्यूम में 1.8% की गिरावट आई है। सबसे बड़ा झटका तेल की कीमतों से मिला है, जो पिछले साल के $72.6 प्रति बैरल से घटकर इस तिमाही में $61.6 प्रति बैरल रह गई है।
रेवेन्यू और मुनाफे पर दबाव
कम तेल की कीमतों और वॉल्यूम में आई नरमी का असर ONGC के नतीजों पर साफ दिख रहा है। इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) पिछली तिमाही से 4.5% और पिछले साल की इसी तिमाही से 6.4% घटकर ₹315.5 अरब पर आ गया। इसी तरह, एबिटडा (EBITDA) में भी पिछली तिमाही की तुलना में 2.1% और साल-दर-साल 8.7% की गिरावट आई है, जो ₹173.2 अरब रहा।
हालांकि, नेट प्रॉफिट (PAT) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 1.6% बढ़कर ₹83.7 अरब हो गया, लेकिन यह बढ़ोतरी सिर्फ टैक्स (Tax) में मिली राहत के कारण है। पिछली तिमाही के मुकाबले नेट प्रॉफिट में 15.0% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़े भारत के ऑयल और गैस अपस्ट्रीम मार्केट (Oil and Gas Upstream Market) के लिए अनुमानित 5% सीएजीआर (CAGR) ग्रोथ के विपरीत हैं।
प्रोडक्शन टारगेट और ग्लोबल फैक्टर्स
ONGC का लक्ष्य है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 तक उसका स्टैंडअलोन प्रोडक्शन 21.0 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल और 21.5 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस तक पहुंच जाए। लेकिन, Prabhudas Lilladher का अनुमान थोड़ा कम है। ब्रोकरेज का फोरकास्ट है कि फाइनेंशियल ईयर 2025 से 2028 के बीच ऑयल प्रोडक्शन में 1.7% सीएजीआर और गैस प्रोडक्शन में 2.6% सीएजीआर (जॉइंट वेंचर्स सहित) की बढ़ोतरी हो सकती है।
दुनियाभर में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों में गिरावट का अनुमान है, जो 2026 में औसतन $58 और 2027 में $53 प्रति बैरल रह सकती है। बढ़ती ग्लोबल इन्वेंट्री (Global Inventory) को इसका कारण माना जा रहा है। ऐसे में, ONGC की कमाई पर लगातार दबाव बना रह सकता है।
स्ट्रक्चरल चुनौतियां और वैल्यूएशन
भारत के अपस्ट्रीम सेक्टर में ONGC की मजबूत स्थिति के बावजूद, कंपनी कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। ONGC का मौजूदा पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 9.15-9.24 है, जो इसके पीयर रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के 23-24 के पी/ई रेश्यो से काफी कम है। यह ONGC को ग्रोथ की संभावनाओं के मुकाबले सस्ता दिखा सकता है, लेकिन असली चिंता प्रोडक्शन बढ़ाने की मुश्किलों और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से है।
हाल की तिमाहियों में ऑपरेटिंग एक्सपेंडिचर (Operating Expenditure), डेप्रिसिएशन (Depreciation) और एक्सप्लोरेशन कॉस्ट (Exploration Cost) में वृद्धि ने भी मुनाफे को प्रभावित किया है। इसके अलावा, भारत की 90% तक क्रूड आयात पर निर्भरता और एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन पर 18% जीएसटी (GST) जैसे सरकारी नियम भी जोखिम बढ़ाते हैं।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
Prabhudas Lilladher ने ONGC के लिए ₹297 का टारगेट प्राइस सेट किया है। वहीं, अन्य एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। HDFC Sky ने प्रोडक्शन में धीमी गति को देखते हुए 'Reduce' रेटिंग और ₹220 का टारगेट दिया है। दूसरी ओर, Kotak और CLSA ने 'Buy' रेटिंग और टारगेट प्राइस बढ़ाकर क्रमशः ₹285 और ₹320 कर दिया है।
कुल मिलाकर, 30 एनालिस्ट्स की कंसेंसस (Consensus) 'Buy' रेटिंग की ओर इशारा करती है, जिसका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस लगभग ₹278-280 है। हालांकि, टारगेट प्राइस में काफी बड़ा अंतर (₹200 से ₹350) ONGC की वॉल्यूम ग्रोथ और भविष्य की कमाई को लेकर अनिश्चितता को दर्शाता है।