ONGC ने लॉन्ग-टर्म प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए एक भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट प्लान तैयार किया है। कंपनी डीपवॉटर प्रोजेक्ट्स के लिए **₹1 लाख करोड़** और वेस्टर्न ऑफशोर के पुराने फील्ड्स को सुधारने के लिए **₹40,000 करोड़** का निवेश करेगी।
मिशन 'समुद्र मंथन' की शुरुआत
ONGC ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूती देने के लिए कमर कस ली है। कंपनी ने डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन पर अगले पांच सालों में ₹1 लाख करोड़ खर्च करने का फैसला किया है। यह कदम सरकार के 'मिशन समुद्र मंथन' का हिस्सा है, जिसे ₹84,084 करोड़ का आउटले मिला है और इसका लक्ष्य 2030-31 तक ऑफशोर गतिविधियों को रफ्तार देना है। इसके अलावा, वेस्टर्न ऑफशोर के पुराने फील्ड्स में ₹40,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया जाएगा ताकि पुराने कुओं की लाइफ बढ़ाई जा सके और प्रोडक्शन में आ रही गिरावट को रोका जा सके।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का मिला-जुला असर
कंपनी के हालिया फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे। एक तरफ, ONGC का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 112% बढ़कर ₹17,034 करोड़ पर पहुंच गया, वहीं दूसरी ओर कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में 43% की गिरावट दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण रिफाइनिंग सब्सिडियरीज का खराब प्रदर्शन है, जो ग्लोबल फ्यूल कीमतों के उतार-चढ़ाव से बुरी तरह प्रभावित होती हैं।
चुनौतियां और भविष्य की राह
इतने बड़े निवेश चक्र के साथ जोखिम भी जुड़े हैं। डीपवॉटर ड्रिलिंग तकनीकी रूप से जटिल और महंगी है। कंपनी अभी भी विदेशी रिग्स (Rigs) पर निर्भर है, जिससे लागत और समय में देरी का खतरा बना रहता है। साथ ही, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आने वाली गिरावट कंपनी के मार्जिन पर सीधा असर डालती है। फिलहाल, निवेशक अब इन प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस और कंपनी की नई एनर्जी ट्रेडिंग यूनिट पर नजर बनाए हुए हैं।
