मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें **$91** प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। इस खबर के बाद ONGC और Oil India के शेयरों में **2%** का उछाल देखा गया है, हालांकि निवेशक अब कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय ऊर्जा कंपनियों पर साफ दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव की खबरों के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ONGC और Oil India को बड़ा सहारा मिला है।\n\n### ONGC का मेगा प्लान और चुनौतियां\n\nभले ही क्रूड की बढ़ती कीमतें कंपनियों के मुनाफे के लिए शॉर्ट-टर्म में अच्छी हैं, लेकिन असली परीक्षा कंपनी के लॉन्ग-टर्म विजन की है। ONGC ने आने वाले 5 सालों के लिए ₹1 लाख करोड़ के निवेश का मास्टर प्लान तैयार किया है। इस फंड से 87 डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी, जो सरकार के ₹84,084 करोड़ के 'समुद्र मंथन' प्रोग्राम का हिस्सा है।\n\nहालांकि, राह आसान नहीं है। कंपनी को अपने पुराने फील्ड्स से प्रोडक्शन बनाए रखने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रमुख KG 98/2 फील्ड का उत्पादन फिलहाल 20,000 बैरल प्रतिदिन है, जो 35,000 बैरल के लक्ष्य से काफी पीछे है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है खास?\n\nबाजार अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या कंपनी अपनी इन चुनौतियों से पार पाकर प्रोडक्शन बढ़ा पाएगी या नहीं। आने वाले समय में कंपनी की इंटरनेशनल ट्रेडिंग यूनिट की शुरुआत एक बड़ा ट्रिगर हो सकती है, जो इसे पेट्रोलियम सेल्स में और ज्यादा लचीलापन प्रदान करेगी। फिलहाल, भू-राजनीतिक अस्थिरता और सप्लाई चेन के जोखिमों के बीच निवेशकों को काफी सतर्क रहने की सलाह है।
