Trinidad and Tobago सरकार ने ONGC Videsh और Oil India के साथ मिलकर **1,65,000 बैरल** प्रति दिन की क्षमता वाली Guaracara रिफाइनरी को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू की है। यह प्रोजेक्ट वेनेजुएला के क्रूड को प्रोसेस करने का एक नया जरिया बन सकता है।
रिफाइनरी का गणित और चुनौतियां
त्रिनिदाद और टोबैगो की यह रिफाइनरी साल 2018 से बंद पड़ी है और भारी कर्ज व ऑपरेशनल दिक्कतों से जूझ रही है। अगर ONGC और Oil India इस पर आगे बढ़ते हैं, तो उन्हें इसके आधुनिकीकरण और मरम्मत पर भारी निवेश करना होगा। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस पुराने प्लांट को दोबारा चालू करना आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होगा।
ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेस्ट एशियन देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। कैरिबियन क्षेत्र में वेनेजुएला के कच्चे तेल को रिफाइन करने से भारतीय कंपनियों को सप्लाई चेन में बड़ी स्थिरता मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा जियो-पॉलिटिकल हालात और अमेरिकी प्रतिबंधों की अनिश्चितता एक बड़ा रिस्क बनी हुई है।
आगे क्या?
फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े निजी खिलाड़ी पहले से ही भारी क्रूड (Heavy Crude) को प्रोसेस कर रहे हैं, लेकिन PSU कंपनियों का इसमें शामिल होना सरकारी स्तर पर तालमेल की जरूरत को दर्शाता है। अभी निवेशकों को कंपनियों की ओर से आने वाली फिजिबिलिटी स्टडी (Feasibility Study) की रिपोर्ट्स का इंतजार करना चाहिए।
