ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने जून तिमाही के लिए अपने नतीजों का ऐलान कर दिया है, जिसमें कंपनी के नेट प्रॉफिट में **156%** का जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। यह उछाल ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और गैस की ऊंची कीमतों के कारण आया है। हालांकि, उत्पादन में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
मुनाफे में शानदार तेजी
ONGC ने जून तिमाही में ₹17,033.81 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो कि पिछली मार्च तिमाही के ₹6,649.97 करोड़ के मुकाबले 156% ज्यादा है। कंपनी ने इस शानदार बढ़ोतरी का श्रेय कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में आई तेजी को दिया है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी 29.3% बढ़कर ₹46,460.45 करोड़ पर पहुंच गया।
EBITDA और ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार
कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) में भी काफी सुधार देखने को मिला। EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) पिछले तिमाही के ₹12,666 करोड़ से बढ़कर ₹28,355 करोड़ हो गया। इसके चलते ऑपरेटिंग मार्जिन 35.3% से बढ़कर 61% पर पहुंच गया। कच्चे तेल का औसत भाव $99.45 प्रति बैरल रहा, जो पिछले साल के $66.13 से काफी ज्यादा है। वहीं, गैस की कीमतें भी बढ़कर $13.31 प्रति mmBtu हो गईं, जो पिछले साल इसी अवधि में $8.24 थीं।
उत्पादन में आई गिरावट
मुनाफे में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, ONGC के प्रोडक्शन वॉल्यूम (Production Volumes) में थोड़ी कमी आई है। कच्चे तेल का उत्पादन 4.452 मिलियन मीट्रिक टन रहा, जो पिछले साल के 4.683 मिलियन मीट्रिक टन से कम है। नेचुरल गैस का उत्पादन भी 4.756 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 4.846 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गया। कंपनी ने इसके पीछे KG-98/2 ब्लॉक की तकनीकी दिक्कतें, पाइपलाइन मेंटेनेंस और कुछ कुओं को अस्थायी रूप से बंद करना बताया है।
बड़े प्रोजेक्ट्स पर चल रहा है काम
प्रोडक्शन को बनाए रखने के लिए ONGC वेस्टर्न ऑफशोर रीजन में ₹40,000 करोड़ से ज्यादा के कैपिटल प्रोजेक्ट्स (Capital Projects) पर काम कर रही है। कंपनी को उम्मीद है कि दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (DUDP) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (DSF) जैसे प्रोजेक्ट्स से 2027-28 फाइनेंशियल ईयर तक उत्पादन में सुधार देखने को मिलेगा।
निवेशकों के लिए खास बातें
कंपनी ने ₹22,848 करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही प्रॉफिट बिफोर टैक्स (Profit Before Tax) दर्ज किया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि ONGC कैसे ग्लोबल कमोडिटी कीमतों की अस्थिरता और प्रोडक्शन वॉल्यूम को स्थिर करने की जरूरत के बीच संतुलन बनाती है। बड़े ऑफशोर प्रोजेक्ट्स की प्रगति और DUDP प्रोजेक्ट का सफल कमिशनिंग कंपनी की लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल स्टेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
