ONGC: तेल आयात घटाने के लिए अब डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन और E20 इथेनॉल पर बड़ा दांव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ONGC: तेल आयात घटाने के लिए अब डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन और E20 इथेनॉल पर बड़ा दांव

भारत अपनी तेल जरूरतों का **90%** हिस्सा आयात करता है। इसे कम करने के लिए ONGC अब डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन और E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग को प्राथमिकता दे रही है ताकि देश की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हो सके।

भारत सरकार और ONGC मिलकर देश की एनर्जी निर्भरता को कम करने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। फिलहाल भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 90% हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसे कम करने के लिए कंपनी अब डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन (Deepwater Exploration) में भारी निवेश कर रही है।

डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन और कैपिटल स्पेंडिंग

ONGC के डायरेक्टर (एक्सप्लोरेशन) ओम प्रकाश सिन्हा ने बताया कि कंपनी अब फ्रंटियर बेसिन में डीपवॉटर ड्रिलिंग पर जोर दे रही है। यह काम काफी चुनौतीपूर्ण है और इसमें भारी मात्रा में कैपिटल खर्च (Capital Spending) की जरूरत होती है। निवेशकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि ऐसे प्रोजेक्ट्स का टाइमलाइन लंबा होता है और प्रोडक्शन शुरू होने में समय लगता है। किसी भी तरह की देरी कंपनी के कैश फ्लो और प्रोडक्शन टारगेट्स को प्रभावित कर सकती है।

E20 इथेनॉल का बढ़ता दायरा

पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य भी एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि पेट्रोल की मांग पर भी सीधा असर पड़ेगा। इस पूरी चेन में केवल ONGC ही नहीं, बल्कि Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियां भी शामिल हैं, जो अपने रिटेल नेटवर्क के जरिए इस मिश्रण को डिस्ट्रीब्यूट कर रही हैं।

आगे क्या देखें?

जनवरी में कोलकाता में होने वाली 'इंडिया एनर्जी वीक 2027' पर सबकी नजरें होंगी। यहाँ हाइड्रोजन और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) जैसे नए विकल्पों पर बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं। निवेशकों के लिए ONGC की तिमाही रिपोर्ट और कैपिटल स्पेंडिंग के अपडेट्स पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यही कंपनी की लॉन्ग-टर्म प्रोडक्शन क्षमता तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.