📉 ONGC के ESG स्कोर्स में आई गिरावट: पूरी कहानी
FY25 के लिए ONGC के एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ESG) परफॉर्मेंस के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं। जहां FY24 में कंपनी का एनवायरनमेंटल स्कोर 63.5 था, वहीं FY25 में यह गिरकर 49.3 पर आ गया है। इसी तरह, सोशल पिलर का स्कोर 76.8 से घटकर 68.3 हो गया है, जबकि गवर्नेंस पिलर 70 से घटकर 67.2 पर पहुंच गया है।
एनवायरनमेंट और सोशल पर क्या है असर?
कंपनी ने भले ही 2038 तक नेट जीरो (Net Zero) और 2030 तक 10 GW रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य रखा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहती है। पानी की खपत और इंटेंसिटी में कमी आई है, लेकिन ग्रीनहाउस गैस (GHG) एमिशन (स्कोप 1, 2 और 3) में बढ़ोतरी हुई है। चिंता की बात यह है कि एनर्जी कंजर्वेशन के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) में खासी कटौती की गई है, और कुल एनर्जी खपत में रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा सिर्फ 0.25% है। कंपनी को पर्यावरण से जुड़े नॉन-कंप्लायंस के नोटिस भी मिले हैं। सोशल फ्रंट पर, वर्कफोर्स डायवर्सिटी में सुधार हुआ है, लेकिन 3 मौतों और 39 काम से जुड़ी चोटों की घटनाओं में इजाफा हुआ है। हेल्थ और सेफ्टी ट्रेनिंग 50% से भी कम कर्मचारियों को मिल रही है।
गवर्नेंस पर उठा सबसे बड़ा सवाल
ONGC के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय गवर्नेंस है। SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के तहत बोर्ड कंपोजीशन के नियमों का पालन नहीं किया गया है। खासकर, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (IDs) और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स (NEDs) की आवश्यक संख्या पूरी नहीं है। इस वजह से स्टॉक एक्सचेंजों से पेनल्टी भी लगी है। SES ESG ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें कूलिंग-ऑफ पीरियड का अभाव और शेयरहोल्डर अप्रूवल में देरी शामिल है।
इसके अलावा, मैटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स (RPTs) में पारदर्शिता और 'आर्म्स लेंथ' प्राइसिंग के औचित्य पर भी सवाल उठाए गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति के खिलाफ 20.63% पब्लिक शेयरधारकों ने वोट किया, जो मैनेजमेंट और शेयरधारकों के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है।
🚩 रिस्क और आगे की राह
ONGC के लिए मुख्य रिस्क गवर्नेंस में आई इन खामियों से जुड़े हैं। SEBI के नियमों का लगातार उल्लंघन आगे और भी पेनल्टी, रेगुलेटरी सख्ती और रेपुटेशनल डैमेज का कारण बन सकता है, जिससे इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस पर बुरा असर पड़ेगा। RPTs से जुड़े पारदर्शिता के मुद्दे हितों के टकराव और अनुचित व्यवहार की आशंका पैदा करते हैं। पर्यावरण के मोर्चे पर, नेट जीरो लक्ष्यों के बावजूद बढ़ते GHG एमिशन और एनर्जी कंजर्वेशन में घटते निवेश से लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल और रेगुलेटरी रिस्क जुड़े हैं। बढ़ती मौतें और चोटें भी देनदारी और कंपनी की छवि के लिए खतरा हैं।
आगे चलकर, निवेशकों की नजर ONGC के उन ठोस कदमों पर रहेगी जिनसे वह SEBI नॉन-कंप्लायंस को दूर कर सके और बोर्ड की स्वतंत्रता को मजबूत कर सके। कंपनी की RPTs को पारदर्शी तरीके से संभालने की क्षमता और नेट जीरो व रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों पर वास्तविक प्रगति दिखाना महत्वपूर्ण होगा। अगर इन गवर्नेंस और एनवायरनमेंटल चिंताओं का समाधान नहीं हुआ, तो रेटिंग में गिरावट जारी रह सकती है और कंपनी की पूंजी जुटाने की क्षमता और वैल्यूएशन प्रभावित हो सकता है।