ONGC कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन पर बड़ा दांव लगाने जा रही है। कंपनी ने साल 2031 तक के लिए **₹1 लाख करोड़** के मेगा निवेश का ऐलान किया है, ताकि क्रूड ऑयल के उत्पादन को और बढ़ाया जा सके।
आक्रामक एक्सपेंशन की तैयारी
कंपनी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि ओएनजीसी $60 से $90 प्रति बैरल की रेंज में क्रूड ऑयल की कीमतों को झेलने में सक्षम है। अपनी इसी मजबूती के दम पर कंपनी ने ₹1 लाख करोड़ के भारी-भरकम निवेश का खाका तैयार किया है, जिसका मुख्य फोकस डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन पर होगा। कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2031 तक 87 नए कुएं खोदने का है। इस बड़े मिशन के लिए कंपनी BP और Shell जैसी ग्लोबल दिग्गजों के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ उठाया जा सके।
नतीजों का दोहरा चेहरा
जून तिमाही (FY27) के नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं। एक ओर जहां स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी का नेट प्रॉफिट 112% उछलकर ₹17,034 करोड़ पर पहुंच गया, वहीं दूसरी ओर कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में 43% की गिरावट देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह रिफाइनिंग सब्सिडियरीज जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम के मार्जिन्स पर बना दबाव है, जिसने कंपनी के ओवरऑल मुनाफे को प्रभावित किया है।
भविष्य की योजनाएं और रिस्क
ओएनजीसी अब सिर्फ तेल निकालने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी 2026 के अंत तक दुबई या सिंगापुर में एक ग्लोबल ऑयल ट्रेडिंग जॉइंट वेंचर शुरू करने की तैयारी में है। साथ ही, 2030 तक 10 GW की रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी हासिल करने का लक्ष्य भी रखा गया है। हालांकि, निवेशकों को सप्लाई चेन की जटिलताओं और रिफाइनिंग मार्जिन्स के रिस्क पर नजर रखनी होगी, क्योंकि यही वो कारक हैं जो कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन को तय करेंगे।
