ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें **$109** प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर IOC, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल और LPG की स्थिर कीमतों के कारण कंपनियों को भारी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है।
मुनाफे पर भारी संकट
सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) इस समय एक कठिन दौर से गुजर रही हैं। कच्चे तेल की कीमतें $100 का स्तर पार कर $109 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर कंपनियों के रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन पर दिख रहा है।
घाटे का गणित
निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि मई 2026 के बाद से घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्तमान में कंपनियां पेट्रोल पर ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। वहीं, एक एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी का आंकड़ा ₹200 के करीब पहुंच गया है।
क्यों बढ़े दाम?
इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिससे सप्लाई चेन में बाधा आने का डर है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक $100 के ऊपर बनी रहीं, तो इसका सीधा असर कंपनियों की बैलेंस शीट और कैश फ्लो पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अगली तिमाही के नतीजों (Q2 FY27) पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, कंपनियां मुनाफे और सरकारी पॉलिसी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। निवेशकों को मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे इस बढ़ते लागत के दबाव को कैसे मैनेज करेंगे और क्या सरकार से उन्हें कोई राहत मिलेगी या नहीं।
