कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर **$107** प्रति बैरल पहुंच गई हैं, जिससे भारतीय तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर बुरा असर पड़ रहा है। हालांकि, रिफाइनिंग से हुई कमाई इस तिमाही में कंपनी के मुनाफे को सहारा दे सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। तेल की कीमतें $107 प्रति बैरल तक पहुंचने से पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर मिलने वाला मार्केटिंग मार्जिन सितंबर में नेगेटिव होने का अनुमान है। जानकारों के मुताबिक, इस महीने पेट्रोल पर ₹7.4 और डीजल पर ₹10.3 प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है।
रिफाइनिंग मार्जिन बनी उम्मीद की किरण
हालांकि रिटेल बिक्री पर दबाव है, लेकिन सितंबर तिमाही में कंपनियों की कुल वित्तीय स्थिति जून तिमाही के मुकाबले बेहतर रहने की उम्मीद है। इसकी बड़ी वजह जुलाई और अगस्त में रिफाइनिंग से हुई शानदार कमाई है। Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation जैसी कंपनियां अपनी रिफाइनिंग क्षमता के जरिए कच्चे तेल को प्रोसेस करके मोटा मुनाफा कमा रही हैं।
बेंचमार्क में बड़ा उछाल
आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से अगस्त के बीच 'सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन' औसतन $24.5 प्रति बैरल रहा, जो कि $5.6 के ऐतिहासिक औसत से कहीं ज्यादा है। यह कमाई उन कंपनियों के लिए एक मजबूत सेफ्टी नेट की तरह है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार तेल की कीमतों में बदलाव को मंजूरी देती है या कंपनियों को यह बोझ खुद उठाना पड़ेगा। अगर ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो यह रिफाइनिंग से होने वाले मुनाफे को भी निगल सकता है, जिससे कंपनियों के शेयर प्राइस पर असर पड़ना तय है।
