भारत की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अब कमर्शियल LPG यूजर्स को पुराने गैस-आधारित सिलेंडरों से हटकर ज़्यादा एफिशिएंट लिक्विड ऑफ-टेक (LOT) सिस्टम अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। इस बड़े बदलाव का लक्ष्य हर साल ₹21,900 करोड़ के फ्यूल वेस्टेज को खत्म करना है, जिससे सिलेंडर का लगभग पूरा गैस इस्तेमाल हो सकेगा।
क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?
भारत की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अब कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के इस्तेमाल के तरीके को बदलने के लिए एक बड़ा अभियान चला रही हैं। इंडस्ट्री अब करीब बीस सालों से चले आ रहे पारंपरिक वेपर ऑफ-टेक सिलेंडरों को हटाकर लिक्विड ऑफ-टेक (LOT) सिस्टम अपनाने की ओर बढ़ रही है। इस बदलाव का मुख्य मकसद कमर्शियल सेक्टर में फ्यूल की बर्बादी को हमेशा के लिए खत्म करना है।
पुरानी तकनीक से बर्बादी कैसे?
खास बात यह है कि स्टैंडर्ड एलपीजी सिलेंडर गैस को वेपर फॉर्म में बाहर निकालते हैं। ऐसे में, जब सिलेंडर में प्रेशर कम होता है, तो करीब 1 किलो फ्यूल नीचे लिक्विड के रूप में फंसा रह जाता है। देश भर में रेस्टोरेंट, होटल और फैक्ट्रियों में हर दिन इस्तेमाल होने वाले लाखों सिलेंडरों को देखें तो यह हर दिन लगभग 4,000 टन एलपीजी की बर्बादी है। एक साल में यह बर्बादी 1.46 मिलियन टन तक पहुंच जाती है, जो भारत की इंपोर्ट पर निर्भरता को और बढ़ाती है।
पैसों और देश के लिए फायदे
LOT सिस्टम, जो लिक्विड स्टेट में फ्यूल निकालने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, को अपनाने से बिजनेस सिलेंडर का पूरा हिस्सा इस्तेमाल कर पाएंगे। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय को मिली जानकारी के अनुसार, इस बदलाव से देश को सालाना लगभग ₹21,900 करोड़ की बचत हो सकती है। सिर्फ पैसों की बचत ही नहीं, बल्कि फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ने से देश की इंपोर्टेड एनर्जी पर निर्भरता भी कम होगी, जो मौजूदा ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच एक बड़ा फोकस एरिया है।
अपनाने में क्या थीं मुश्किलें?
हालांकि, LOT टेक्नोलॉजी भारतीय बाजार में 2007 से मौजूद है, लेकिन सालों तक इसके प्रचार और जागरूकता की कमी के कारण इसे अपनाने की रफ्तार काफी धीमी रही। बिजनेस पहले से इस्तेमाल हो रहे वेपर-बेस्ड सिस्टम को ही पसंद करते आए थे। लेकिन अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एक्टिवली इस बदलाव का सपोर्ट कर रही हैं, और इस पहल के तहत देश भर में 1,000 से ज्यादा बिजनेस इससे जुड़ चुके हैं। इसे सेफ्टी अपग्रेड के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि LOT सिस्टम इंडस्ट्रियल जरूरतों को स्टैंडर्ड सिलेंडरों से ज़्यादा प्रभावी ढंग से संभालते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है देखने लायक?
निवेशकों के लिए, इस बदलाव की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रोजाना इस्तेमाल करने वाले 4 मिलियन कमर्शियल यूजर्स कितनी तेजी से इस सिस्टम को अपनाते हैं। मुख्य बातें जिन पर नज़र रखनी चाहिए, उनमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा अपनी सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर को अपडेट करने की स्पीड और क्या सरकार पुराने सिलेंडर टाइप्स को फेज-आउट करने के लिए और प्रोत्साहन या नए नियम लाती है। यह कदम अंततः ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार ला सकता है, क्योंकि फ्यूल की बर्बादी से जुड़े लॉजिस्टिक्स और प्रोक्योरमेंट ओवरहेड कम होंगे। हालांकि, प्रॉफिट मार्जिन पर तत्काल प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इंप्लीमेंटेशन की लागत की तुलना में कितनी बचत होती है।
