मिडल ईस्ट में जारी तनाव के कारण क्रूड ऑयल की सप्लाई बाधित हुई है और फ्रेट (Freight) लागत आसमान छू रही है। इसका सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है, जो पेट्रोल पर **₹26** और डीजल पर **₹30** प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं।
मिडल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने इंडियन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्रूड ऑयल इंपोर्ट करने की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि फ्रेट रेट्स में आठ गुना तक का उछाल आया है। फिलहाल ये खर्च कुल लैंडेड कॉस्ट (Landed Cost) का 25% से ज्यादा हो चुका है, जो सामान्य स्थितियों की तुलना में बहुत अधिक है। सिर्फ एक हफ्ते में फ्रेट रेट्स में 8% की बढ़त ने रिफाइनर्स के ऑपरेशनल खर्च को और बढ़ा दिया है।
फाइनेंशियल्स पर दबाव
IOCL, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों का बिजनेस मॉडल रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन के तालमेल पर टिका होता है। लेकिन, रिटेल फ्यूल कीमतों में बदलाव न होने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इनकी मार्केटिंग डिवीजन को भारी मार झेलनी पड़ रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि मिडिल ईस्ट से आने वाला तेल प्रवाह अब अपने पुराने स्तर का केवल 75% रह गया है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इन्वेस्टर्स के लिए यह समय बहुत क्रिटिकल है। हालांकि कंपनियां अपनी रिफाइनिंग मार्जिन से इन नुकसानों की भरपाई करने की कोशिश करती हैं, लेकिन मौजूदा घाटे का स्तर काफी बड़ा है। निवेशकों को आने वाले हफ्तों में 'इंडियन क्रूड बास्केट' के मूवमेंट और सरकारी हस्तक्षेप या फ्यूल सब्सिडी से जुड़े फैसलों पर नजर रखनी चाहिए। इन कंपनियों के तिमाही नतीजों में साफ दिखेगा कि बढ़ती लागत का असर उनके डेट (Debt) और कैश फ्लो पर कितना गहरा पड़ा है।
