India Inc की कमाई पर तेल कंपनियों का ग्रहण! बाकी सेक्टर्स ने दिखाया दम

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Inc की कमाई पर तेल कंपनियों का ग्रहण! बाकी सेक्टर्स ने दिखाया दम

इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (Q1 FY27) में भारतीय कंपनियों के नतीजे मिले-जुले रहे। कुल मिलाकर मुनाफे में सिर्फ **2%** की मामूली बढ़त दिखी, जिसकी मुख्य वजह इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को हुआ **₹16,600 करोड़** का भारी घाटा है। अगर इन तेल कंपनियों को छोड़ दें, तो बाकी भारतीय कॉर्पोरेट्स ने **17%** की दमदार प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की है।

तेल कंपनियों के घाटे का असर

इस तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) का सम्मिलित घाटा करीब ₹16,600 करोड़ रहा। अकेले एचपीसीएल ने ₹11,526 करोड़ का भारी नेट लॉस दर्ज किया, जबकि बीपीसीएल को ₹3,962 करोड़ और आईओसीएल को ₹1,141 करोड़ का घाटा हुआ। इस खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में हुई बड़ी बढ़ोतरी है। भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 21.4% बढ़कर $100.7 प्रति बैरल तक पहुंच गई। लेकिन, घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वैश्विक लागत के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं होने के कारण, इन कंपनियों को भारी अंडर-रिकवरी और इन्वेंट्री लॉस का सामना करना पड़ा।

अन्य सेक्टर्स की चमक

जब इन तेल कंपनियों के घाटे को नतीजों से अलग किया जाता है, तो बाकी कंपनियों की तस्वीर काफी सकारात्मक दिखती है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, बाकी सेक्टर्स में 17% की सालाना ग्रोथ देखी गई। इसमें फाइनेंशियल सर्विसेज (बैंकिंग और इंश्योरेंस) सेक्टर सबसे आगे रहा, जिसने 20% का ग्रोथ रेट हासिल किया। मेटल सेक्टर में भी शानदार रिकवरी देखने को मिली और मुनाफे में 57% का इजाफा हुआ। वहीं, आईटी (IT) और ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी स्थिर प्रदर्शन करते हुए क्रमश: 11% और 7% की प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की। हालांकि, सीमेंट और हेल्थकेयर जैसे कुछ सेक्टर्स के साथ-साथ इंडिगो (IndiGo) जैसी बड़ी कंपनियों को भी इस तिमाही में मुनाफे में गिरावट का सामना करना पड़ा, जिसने एग्रीगेट आंकड़ों को और नीचे खींचा।

आगे क्या?

निवेशकों के लिए तेल मार्केटिंग कंपनियों का घाटा एक अहम चिंता का विषय बना रहेगा। एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति काफी हद तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करती है, जो सीधे तौर पर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों को प्रभावित करती हैं। अगली तिमाही में रिकवरी के लिए, बाजार की नजरें कच्चे तेल की कीमतों के $80 प्रति बैरल से नीचे स्थिर होने और घरेलू पंप कीमतों में लगातार समायोजन पर होंगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो इन कंपनियों को अपने वर्किंग कैपिटल को मैनेज करने के लिए उधार पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। इन चुनौतियों के बावजूद, आधे से ज्यादा कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.