प्रोजेक्ट की लागत क्यों बढ़ी?
Numaligarh Refinery के इस बड़े एक्सपेंशन प्रोजेक्ट (NREP) में लगातार लागत बढ़ रही है। कंपनी ने सरकार को ₹5,900 करोड़ का अतिरिक्त बजट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, जिससे कुल अनुमानित खर्च ₹33,901 करोड़ तक पहुंच गया है। यह साल 2019 में तय की गई ₹22,594 करोड़ की शुरुआती लागत से काफी ज्यादा है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
देरी के पीछे क्या हैं कारण?
NRL के अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने की मुख्य वजहें हैं: कोविड-19 महामारी का असर, सप्लायर्स द्वारा दाम बढ़ाए जाने से प्रोक्योरमेंट एक्सपेंस में बढ़ोतरी, और भारी मॉनसून। इन सब के चलते प्रोजेक्ट के पूरा होने की तारीख 2023 से बढ़कर दिसंबर 2026 हो गई है।
प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति
खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट का करीब 85% काम पूरा हो चुका है और इसमें अब तक ₹27,601 करोड़ खर्च भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद, लगातार बढ़ रही लागत प्रोजेक्ट की प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल खड़े कर रही है। यह पैटर्न भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आम है, जहां कई बड़े प्रोजेक्ट्स में लागत तय अनुमान से काफी ज्यादा हो जाती है।
प्रोजेक्ट का भविष्य और विश्लेषण
NRL, जो एक 'नवरत्न' कंपनी है, अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी को 3 MMTPA से बढ़ाकर 9 MMTPA करने जा रही है। इसके लिए 1,635 किलोमीटर लंबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन और 610 किलोमीटर लंबी प्रोडक्ट पाइपलाइन बिछाई जा रही है। पहली बार, NRL डोमेस्टिक फीडस्टॉक की कमी के कारण इंपोर्टेड क्रूड ऑयल (Arab Light और Arab Heavy 30:70 रेश्यो में) का इस्तेमाल करेगी। प्रोजेक्ट के लिए 70:30 डेट-टू-इक्विटी रेश्यो के तहत 12 बैंकों के कंसोर्टियम से फाइनेंसिंग ली गई है, जिसका नेतृत्व SBI कर रहा है।
इस प्रोजेक्ट में लगातार हो रही लागत वृद्धि और समय पर पूरा न हो पाना, प्रोजेक्ट की शुरुआती प्लानिंग, रिस्क मैनेजमेंट और एग्जीक्यूशन पर सवाल उठाता है। दिसंबर 2026 तक पूरी होने वाली देरी से कमाई में भी देरी होगी। इंपोर्टेड क्रूड पर निर्भरता इंटरनेशनल प्राइस वोलेटिलिटी और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बढ़ा सकती है।'
आगे क्या?
इन चुनौतियों के बावजूद, NRL ₹7,231 करोड़ के पॉलीप्रोपाइलीन प्रोजेक्ट और नेट-जीरो एमिशन के लक्ष्य के तहत ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। क्रूड ऑयल इंटीग्रेशन फैसिलिटी (COIF) का दिसंबर 2025 में शुरू होना एक महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी का ऑथराइज्ड कैपिटल ₹5,000 करोड़ और पेड-अप कैपिटल ₹1,759 करोड़ है। प्रोजेक्ट की सफलता PIB की मंजूरी और दिसंबर 2026 तक कुशल संचालन पर निर्भर करेगी, जो पूर्वोत्तर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
