सरकार 1 सितंबर 2026 से एक नई स्कीम ला रही है, जिससे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को हर नए घरेलू कनेक्शन पर कम दाम वाली गैस मिलेगी। इस पॉलिसी से इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगे पैसे वापस आने का समय 10 साल से घटकर सिर्फ 3 साल रह सकता है। इस खबर के बाद Mahanagar Gas, Indraprastha Gas और Adani Total Gas जैसी कंपनियों के शेयर 2% से 6% तक चढ़ गए।
नई गैस पॉलिसी का ऐलान
केंद्र सरकार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए एक खास इंसेंटिव स्कीम लेकर आई है, जो 1 सितंबर 2026 से लागू होगी। इस पॉलिसी का मकसद घरों में पाइप नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन को तेजी से बढ़ाना है। नई पॉलिसी के तहत, एक तय बेसलाइन से ऊपर हर नए घरेलू कनेक्शन के लिए, कंपनियों को एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (APM) के तहत अतिरिक्त 200 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर कम लागत वाली गैस मिलेगी।
10 साल से घटकर 3 साल होगा पेबैक पीरियड
इस बड़े बदलाव से सेक्टर की माली हालत सुधरने की उम्मीद है। कंपनियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगे पैसे वापस आने का समय (कैपेक्स पेबैक पीरियड) जो अभी करीब 10 साल है, वह घटकर सिर्फ 3 साल रह सकता है।
इंपोर्टेड LNG की जगह सस्ती गैस का फायदा
इस पॉलिसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनियां महंगे इंपोर्टेड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की जगह सस्ती लोकल गैस का इस्तेमाल कर सकेंगी। कनेक्शन टारगेट पूरा करने पर, गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स अपनी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) सेगमेंट के लिए ज्यादा कम लागत वाली गैस का इस्तेमाल कर पाएंगे, जिससे मार्जिन बढ़ता है। गैस सोर्सिंग मिक्स में यह बदलाव ही पॉजिटिव मार्केट सेंटीमेंट की मुख्य वजह है। 19-20 अगस्त 2026 को इस ऐलान के बाद, Mahanagar Gas, Indraprastha Gas और Adani Total Gas जैसे प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 2% से 6% तक की तेजी देखी गई।
कौन है सबसे बड़ा लाभार्थी?
Mahanagar Gas के शेयर पर निवेशक कड़ी नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह कंपनी इस पॉलिसी का सबसे बड़ा फायदा उठा सकती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि हाल के दिनों में कंपनी में घरेलू कनेक्शन जुड़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है, जिससे ग्रोथ थ्रेशोल्ड को पार करना इसके साथियों की तुलना में आसान हो सकता है। Indraprastha Gas और Adani Total Gas को भी फायदा होने की उम्मीद है, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे फरवरी 2027 में खत्म होने वाले दो छह-महीने के ट्रांज़ में कितनी तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर डिप्लॉयमेंट कर पाते हैं।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि, यह इंसेंटिव स्ट्रक्चर मुनाफे को बढ़ाने में मदद करेगा, लेकिन निवेशकों को जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखना चाहिए। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कितनी तेजी से कनेक्शन बढ़ा पाती हैं। इसके अलावा, कुछ जोखिम ऐसे हैं जो इस पॉलिसी से नहीं बदले हैं। पहला, यह सेक्टर गैस की लगातार उपलब्धता पर निर्भर करता है, और ग्लोबल LNG कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी सोर्सिंग लागत पर दबाव डाल सकता है। दूसरा, नेचुरल गैस फिलहाल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) फ्रेमवर्क से बाहर है, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट की एफिशिएंसी में दिक्कत आती है और ऑपरेटिंग कॉस्ट पर असर पड़ता है। तीसरा, कंपनियों को राइट-ऑफ-वे की परमिशन हासिल करना और नए इलाकों में पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी अपफ्रंट डिप्लॉयमेंट कॉस्ट जैसी ऑन-ग्राउंड चुनौतियां भी झेलनी पड़ेंगी।
अब बाजार की निगाहें अगली तिमाही के नतीजों पर होंगी कि कंपनियां इस पॉलिसी सपोर्ट को कितने जल्दी कनेक्शन नंबर्स में बदल पाती हैं। मार्जिन प्रोफाइल बनाए रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की कंपनियों की क्षमता ही यह तय करेगी कि अनुमानित 3 साल का पेबैक पीरियड कितना वास्तविक है।
