नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में तिब्बत से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रसुवागढ़ी और अपर त्रिशूली 3A जैसे पावर प्लांट को भारी नुकसान पहुँचा है, जिसके चलते नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (NEPSE) का हाइड्रो इंडेक्स **2.5%** लुढ़क गया है।
आपदा की भयावहता और पावर सेक्टर पर असर
तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में आई इस अचानक बाढ़ (ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट की आशंका) ने 26 अगस्त, 2026 को नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में कोहराम मचा दिया। इस घटना में अब तक 4 से 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कई सुरक्षाकर्मी लापता हैं।
एनर्जी सेक्टर के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि कुल 13 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इनमें 111 MW क्षमता वाला रसुवागढ़ी (Rasuwagadhi), 78 MW का संजेन खोला (Sanjen Khola) और 60 MW का अपर त्रिशूली 3A (Upper Trishuli 3A) शामिल हैं। इसके अलावा चिलिमे (Chilime), त्रिशूली (Trishuli) और देवीघाट (Devighat) स्टेशन भी खतरे की जद में हैं। कुल मिलाकर 354 MW की उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है, जिससे क्षेत्र में बिजली सप्लाई की भारी किल्लत हो सकती है।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर मार
बिजली उत्पादन के अलावा, इस बाढ़ ने नेपाल और चीन को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण ट्रेड ब्रिज को भी तबाह कर दिया है। इससे क्रॉस-बॉर्डर व्यापार और लॉजिस्टिक्स पूरी तरह ठप हो गई है, जिसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ना तय है।
निवेशकों के लिए जोखिम
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स की मरम्मत के लिए मोटी रकम और काफी समय की जरूरत होगी, जिससे कंपनियों की शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म अर्निंग्स पर दबाव बढ़ेगा। अब निवेशकों की नजर सरकार द्वारा किए जाने वाले नुकसान के आकलन और इंश्योरेंस क्लेम की स्थिति पर है। इस आपदा ने पहाड़ी क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आने वाले हफ्तों में इन स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
