नेपाल सरकार ने बिजली व्यापार में सरकारी एकाधिकार को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ऊर्जा मंत्रालय ने 12 प्राइवेट कंपनियों को पावर ट्रेडिंग के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए हैं, हालांकि इनका काम शुरू होना अभी नियमों में बदलाव और भारतीय रेगुलेटरी मंजूरी पर निर्भर है।
बिजली बाजार का उदारीकरण
नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय ने देश के पावर सेक्टर को प्राइवेट प्लेयर के लिए खोलने का निर्णय लिया है। अब तक यहाँ की सरकारी कंपनी, Nepal Electricity Authority का एकछत्र राज रहा है, लेकिन अब 12 प्राइवेट फर्मों को बिजली व्यापार के लिए हरी झंडी दी गई है। इनमें Nepal Power Exchange, NIFRA Trading and Energy Exchange, Green Energy Power Trading और Trans Asia Power Trading जैसी कंपनियां शामिल हैं।
असली चुनौती और पेंच
ये लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) कोई अंतिम लाइसेंस नहीं हैं, बल्कि एक शुरुआती कदम है। अभी ये कंपनियां न तो पावर परचेज एग्रीमेंट साइन कर सकती हैं और न ही क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन को मैनेज कर सकती हैं। इसके लिए दो बड़े सुधार जरूरी हैं:
- कानूनी बदलाव: नेपाल को अपने 1992 के इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में संशोधन करना होगा, जो अभी मंत्रालय की प्रक्रिया में है।
- भारतीय रेगुलेटरी मानक: भारत से बिजली एक्सपोर्ट या ट्रांजिट के लिए भारतीय सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इसमें ग्रिड कनेक्टिविटी, पावर क्वालिटी और ट्रांसमिशन कैपेसिटी जैसे सख्त मानक शामिल हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
सरकार ने इन फर्मों को बाजार अनुसंधान के लिए 2 साल का समय दिया है। हालांकि, ये कंपनियां कब से वास्तविक कारोबार शुरू कर पाएंगी, यह नेपाल के कानून और भारत की रेगुलेटरी परमिशन पर निर्भर करेगा। क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार के नजरिए से यह एक ऐतिहासिक बदलाव है, लेकिन निवेशकों को अभी कानूनी मोर्चे पर प्रगति का इंतजार करना होगा।
