Nayara Energy और Shell ने गंवाई मार्केट हिस्सेदारी, Reliance-BP की धांसू ग्रोथ

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nayara Energy और Shell ने गंवाई मार्केट हिस्सेदारी, Reliance-BP की धांसू ग्रोथ
Overview

अप्रैल में Nayara Energy और Shell को पेट्रोल-डीजल में बड़ा झटका लगा है। बढ़ती कीमतों के चलते दोनों कंपनियों की मार्केट हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है, जबकि सरकारी कंपनियों ने ग्राहकों को अपने पाले में खींच लिया। हालांकि, Reliance-BP ने इस दौरान अपनी बिक्री में अच्छी ग्रोथ दर्ज की।

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प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स की घटती हिस्सेदारी

अप्रैल के महीने में प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स Nayara Energy और Shell के लिए बुरी खबर आई। दोनों कंपनियों ने बढ़ते घाटे को पूरा करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाईं, जिसके चलते उनकी मार्केट हिस्सेदारी में भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्राहकों ने सरकारी तेल कंपनियों का रुख किया, जिन्होंने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद अपनी रिटेल कीमतें स्थिर रखी थीं।

Nayara Energy, जो भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर है, ने अप्रैल में पेट्रोल की बिक्री में 30% और डीजल की बिक्री में 46% की गिरावट दर्ज की। वहीं, दूसरी ओर सरकारी तेल कंपनियों की पेट्रोल और डीजल दोनों की बिक्री में करीब 9% की बढ़ोतरी हुई। इसके चलते Nayara की पेट्रोल मार्केट हिस्सेदारी घटकर 4% और डीजल की 3% रह गई, जो पिछले साल करीब 6% थी।

Shell के तो हालात और भी खराब रहे। डीजल की बिक्री में 77% की भारी गिरावट के साथ कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी घटकर महज 0.07% रह गई, जो पहले 0.3% थी। हालांकि, पेट्रोल की बिक्री 4% बढ़ी, लेकिन कुल मिलाकर मार्केट हिस्सेदारी मामूली घटकर 0.5% पर आ गई।

Reliance-BP ने मारी बाजी

इस गिरावट के बीच Reliance-BP प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी। कंपनी ने बिक्री में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की। Reliance-BP की पेट्रोल बिक्री 23% और डीजल बिक्री 4.5% बढ़ी। इससे कंपनी की पेट्रोल मार्केट हिस्सेदारी 3.5% से बढ़कर 4% हो गई, जबकि डीजल मार्केट हिस्सेदारी करीब 5.3% पर स्थिर बनी रही।

उपभोक्ताओं का व्यवहार और क्षेत्रीय बाजार पर असर

हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर प्राइवेट रिटेलर्स की हिस्सेदारी कम है, लेकिन कुछ क्षेत्रीय बाजारों में उनकी मौजूदगी काफी अहम है। जब कीमतों में अंतर या सप्लाई की समस्या के चलते ग्राहक किसी एक रिटेलर से मुंह मोड़ते हैं, तो आस-पास के आउटलेट्स पर भारी दबाव आ जाता है। ऐसे में ग्राहक अक्सर दूसरे स्टेशनों का रुख करते हैं, जिससे लंबी कतारें लग जाती हैं और सप्लाई की कमी के चलते स्थानीय स्तर पर दिक्कतें पैदा हो जाती हैं।

सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट पंपों से अचानक ग्राहकों का दूसरी जगह जाना और औद्योगिक ग्राहकों का महंगी थोक डीजल खरीद के बजाय अन्य विकल्प तलाशना, कुछ जगहों पर फ्यूल की कमी का कारण बना। ईरान युद्ध के बाद Nayara और Shell की काफी ऊंची रिटेल कीमतें ग्राहकों के लिए एक बड़ा डर साबित हुईं। अब सरकारी कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब ₹4 प्रति लीटर बढ़ा दी हैं।

डीजल की मांग पर एक और दबाव थोक कीमतों के बढ़ने से आया है। रिटेल कीमतों की तुलना में थोक डीजल की कीमत करीब ₹45 प्रति लीटर ज्यादा महंगी हो गई है। ईरान संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद सरकारी तेल कंपनियों ने थोक डीजल की कीमतें बढ़ा दी थीं। नतीजतन, देश की कुल डीजल खपत का करीब 12% हिस्सा रहने वाली थोक डीजल बिक्री में 30-40% की गिरावट आई है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.