Nayara Energy ने अगस्त **2026** में रूस को **$9 करोड़** (लगभग **₹750 करोड़**) कीमत का पेट्रोल निर्यात किया है। यह कदम रूस में ईंधन की कमी को पूरा करने के लिए उठाया गया है, जो कंपनी की जटिल सप्लाई चेन को दर्शाता है।
गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी संचालित करने वाली कंपनी Nayara Energy ने अगस्त 2026 के दौरान लगभग 1.2 लाख टन पेट्रोल रूस भेजा। यह सौदा रूस के कुल रिफाइंड तेल आयात का करीब 70% हिस्सा है, जो बताता है कि रूस में घरेलू ईंधन की भारी किल्लत है।
सर्कुलर ट्रेड का नया पैटर्न
यह पूरा मामला ग्लोबल एनर्जी सेक्टर के एक अनोखे 'सर्कुलर ट्रेड' को उजागर करता है। Nayara Energy में रूसी दिग्गज कंपनी Rosneft की 49.13% हिस्सेदारी है। रिफाइनरी अपनी प्रक्रियाओं के लिए बड़े पैमाने पर रूसी कच्चे तेल (Crude Oil) का उपयोग करती है। इस बार, रिफाइनरी ने उसी कच्चे तेल को प्रोसेस करके पेट्रोल के रूप में वापस रूसी बंदरगाहों तक पहुंचाया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का असर
रूस को यह ईंधन आयात करने की मजबूरी इसलिए पड़ी क्योंकि यूक्रेन द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों ने रूस के इंटरनल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया है। इससे रूस की अपनी रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है। अब वाडिनार रिफाइनरी रूस के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लाई लाइन बन गई है।
रिस्क और चुनौतियां
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि Nayara Energy एक अनलिस्टेड (Unlisted) कंपनी है, जिसका शेयर बाजार में कोई ट्रेड नहीं होता। कंपनी का Rosneft के साथ जुड़ाव इसे अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटर्स की कड़ी निगरानी में रखता है। कंपनी की पूरी निर्भरता केवल वाडिनार रिफाइनरी पर है, और वैश्विक प्रतिबंधों में कोई भी बदलाव आने वाले समय में कंपनी के ऑपरेशंस के लिए बड़े जोखिम पैदा कर सकता है।
