भारत की एनर्जी मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी बढ़ी, FY25 में 7.12% तक पहुंची

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
भारत की एनर्जी मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी बढ़ी, FY25 में 7.12% तक पहुंची

भारत में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, देश के कुल ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर **7.12%** हो गई है, जो पिछले साल **7%** थी। यह बढ़ोतरी क्लीनर फ्यूल की ओर बढ़ते भारत के लक्ष्य को दर्शाती है।

ऊर्जा मिश्रण में नेचुरल गैस का बढ़ता दबदबा

आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए भारत के एनर्जी मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी 7.12% दर्ज की गई है। यह पिछले वित्तीय वर्ष (FY24) में 7% और FY23 में 6.7% की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। यह लगातार इजाफा देश में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों का नतीजा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और भविष्य की मांग

इस वृद्धि का मुख्य कारण सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क का तेजी से विस्तार है। इन नेटवर्क्स के जरिए घरों और उद्योगों तक पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पहुंचाई जा रही है, और परिवहन क्षेत्र के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) स्टेशनों का जाल भी बिछाया जा रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, 2030 तक देश में नेचुरल गैस की मांग बढ़कर 260 से 300 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MSCMD) तक पहुंचने का अनुमान है। यह लक्ष्य एक गैस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने की सरकार की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

यह ट्रेंड ऑयल और गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स, फर्टिलाइजर निर्माताओं और पावर जेनरेशन कंपनियों जैसे कई सेक्टर्स के लिए अहम है। इंद्रप्रस्थ गैस, महानगर गैस और गुजरात गैस जैसी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को इस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का सीधा फायदा मिल रहा है।

हालांकि, इस सेक्टर में कुछ जोखिम भी हैं। इन कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी घरेलू और आयातित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतों पर निर्भर करती है। अगर आयातित LNG की कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि उन्हें प्रतिस्पर्धी कीमतें बनाए रखते हुए अपनी लागत भी वसूलनी होती है।

इसके अलावा, यह एनर्जी मिक्स कितनी तेजी से बदलेगा, यह पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और भारी उद्योगों (जो वर्तमान में कोयला या तेल पर निर्भर हैं) के गैस पर शिफ्ट होने की गति पर निर्भर करेगा। निवेशकों को CGD सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ और नेचुरल गैस की कीमतों या सप्लाई में किसी भी नीतिगत बदलाव पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। आने वाले वर्षों में, कंपनियों की लाभप्रदता बनाए रखने की क्षमता एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.