NTPC Limited ने साल 2037 तक अपनी पावर जनरेशन क्षमता को 244 GW तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। इसके लिए कंपनी **₹16.86 लाख करोड़** का भारी-भरकम केपेक्स (Capex) खर्च करेगी, जिसमें न्यूक्लियर और ग्रीन एनर्जी पर खास फोकस रहेगा।
NTPC Limited ने अपनी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ₹16.86 लाख करोड़ के मेगा केपेक्स प्लान का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य साल 2037 तक अपनी कुल पावर जनरेशन क्षमता को 244 GW तक ले जाना है। यह विस्तार भारत की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ रिन्यूएबल और न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगा।
भविष्य की तैयारी और लक्ष्य
कंपनी ने 2032 तक 149 GW की क्षमता हासिल करने का इंटरमीडिएट माइलस्टोन तय किया है, जिसमें 60 GW हिस्सा केवल रिन्यूएबल एनर्जी से आएगा। वर्तमान में कंपनी की ऑपरेशनल क्षमता करीब 91 GW है। यह निवेश केवल थर्मल पावर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पंप हाइड्रो स्टोरेज, बैटरी एनर्जी सिस्टम और न्यूक्लियर पावर सेक्टर पर बड़ा दांव लगाया गया है।
न्यूक्लियर पावर पर बड़ा दांव
NTPC अब न्यूक्लियर सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही है। सरकार के 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर क्षमता के लक्ष्य में कंपनी 30% हिस्सेदारी हासिल करने का इरादा रखती है। राजस्थान में जॉइंट वेंचर के अलावा, कंपनी 13 राज्यों में 34 संभावित साइटों की जांच कर रही है। यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यूक्लियर एनर्जी चौबीसों घंटे स्थिर बिजली प्रदान करती है, जो सोलर और विंड एनर्जी की अनिश्चितता को बैलेंस करने में मदद करेगी।
वित्तीय और एग्जीक्यूशन रिस्क
इतने बड़े स्तर के निवेश के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। ₹16.86 लाख करोड़ का खर्च कंपनी की बैलेंस शीट पर दबाव बना सकता है। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए अधिक कर्ज (Debt) लेना पड़ सकता है, जिससे ब्याज का बोझ बढ़ेगा और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, न्यूक्लियर जैसे जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण, रेगुलेटरी क्लियरेंस और प्रोजेक्ट देरी जैसी चुनौतियां भी होती हैं, जिससे लागत बढ़ सकती है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट ₹27,546 करोड़ रहा था।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
आने वाले समय में बाजार की नजर कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो और न्यूक्लियर साइट्स के काम की प्रगति पर होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी इतने बड़े विस्तार के बीच अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को कैसे बनाए रखती है और शेयरधारकों को कैसा रिटर्न देती है।
