NTPC: ग्रीन फ्यूल के ग्लोबल बाजार में उतरने की तैयारी, जापान और जर्मनी को निर्यात का है प्लान

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AuthorMehul Desai|Published at:
NTPC: ग्रीन फ्यूल के ग्लोबल बाजार में उतरने की तैयारी, जापान और जर्मनी को निर्यात का है प्लान

NTPC अब ग्रीन अमोनिया और मेथनॉल के एक्सपोर्ट पर दांव लगा रही है। कंपनी आंध्र प्रदेश के पुदीमदाका हब से जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट के लिए बातचीत कर रही है, हालांकि भारी कर्ज और प्रोजेक्ट्स में देरी की चिंताएं निवेशकों को परेशान कर रही हैं।

ग्लोबल मार्केट पर NTPC की नजर

NTPC अब पारंपरिक बिजली उत्पादन के दायरे से बाहर निकलकर ग्लोबल ग्रीन फ्यूल मार्केट में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। कंपनी आंध्र प्रदेश के पुदीमदाका (Pudimadaka) में एक विशाल ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित कर रही है। इस हब के जरिए कंपनी जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी को ग्रीन अमोनिया और मेथनॉल निर्यात करने की योजना बना रही है। चूँकि ये फ्यूल ग्लोबल शिपिंग और ट्रेड के लिए नए स्टैंडर्ड माने जा रहे हैं, इसलिए इनकी मांग में तेजी की उम्मीद है। यह रणनीति भारत सरकार के 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लक्ष्य को भी मजबूती देती है।

कर्ज का दबाव और निवेशकों की चिंता

इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी निवेश की जरूरत है, जिसने कंपनी की फाइनेंशियल सेहत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में कंपनी का डेट-टू-EBITDA रेशियो लगभग 4.90x है, जो काफी अधिक माना जा रहा है। साथ ही, रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) भी केवल 8.4% के आसपास है। एनालिस्ट्स का मानना है कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कैश जनरेट होने में लंबा समय लगता है, जो कंपनी की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।

शेयर पर असर

मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव और कंपनी के कर्ज को लेकर चिंताओं के कारण स्टॉक पर दबाव साफ दिख रहा है। 13 अक्टूबर 2026 को शेयर अपने 52-वीक लो पर भी पहुंचा था। अब निवेशकों की नजर पूरी तरह से उन लॉन्ग-टर्म सप्लाई एग्रीमेंट्स पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि यह प्रोजेक्ट कंपनी के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.