NTPC ने भविष्य की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी का लक्ष्य **2047** तक **30 GW** न्यूक्लियर एनर्जी जोड़ने का है। इसके लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में साइट्स की तलाश की जा रही है।
न्यूक्लियर पावर की तरफ बड़ा कदम
भारत की सबसे बड़ी पावर प्रोड्यूसर कंपनी NTPC अब थर्मल एनर्जी से आगे बढ़कर अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रही है। कंपनी का कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी अभी 91,000 MW से ज्यादा है, जिसे अब न्यूक्लियर एनर्जी के साथ और मजबूत किया जाएगा। यह कदम सरकार के 100 GW न्यूक्लियर क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
कहाँ-कहाँ लग सकते हैं प्लांट?
कंपनी ने बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा में फिजिबिलिटी स्टडी पूरी कर ली है। इसमें बांका, बसाई और नबरंगपुर जैसे इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि अब उत्तर प्रदेश को भी नई लिस्ट में शामिल किया गया है। हर प्लांट 1,400 MW की कैपेसिटी वाला होगा, जिसमें 700-700 MW के दो रिएक्टर लगाए जाएंगे।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को इस प्रोजेक्ट में 'कैपिटल स्पेंडिंग' पर कड़ी नजर रखनी होगी। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि न्यूक्लियर क्षमता बनाने में प्रति गीगावाट ₹15,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ तक का खर्च आ सकता है। इतना बड़ा निवेश कंपनी के डेट ऑब्लिगेशन्स और कैश फ्लो को कैसे प्रभावित करेगा, यह देखना काफी जरूरी होगा।
बड़ी चुनौतियां
न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में लंबा वक्त लगता है और रेगुलेटरी मंजूरी की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। NTPC को 'Department of Atomic Energy' और 'Atomic Energy Commission' से अप्रूवल लेने होंगे। साथ ही जमीन अधिग्रहण और सेफ्टी जोन जैसे मुद्दे भी प्रोजेक्ट की कॉस्ट और टाइमलाइन को प्रभावित कर सकते हैं।
ग्लोबल पार्टनरशिप की तैयारी
एडवांस्ड टेक्नोलॉजी हासिल करने के लिए NTPC, Westinghouse, Rosatom और EDF जैसी इंटरनेशनल कंपनियों के साथ हाथ मिलाने की योजना बना रही है। हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स से कमाई शुरू होने में अभी लंबा वक्त लगेगा, इसलिए निवेशकों को सरकारी क्लीयरेंस और प्रोजेक्ट की प्रगति पर लगातार नजर रखनी चाहिए।
