NTPC के शेयरों में ऊपरी स्तरों से दबाव देखने को मिला है और यह मई के **₹410** के स्तर से गिरकर **₹329** पर आ गया है। कंपनी अपनी कैपेसिटी बढ़ाने के लिए आक्रामक निवेश कर रही है और फाइनेंशियल ईयर **2026** में **₹55,986 करोड़** का भारी-भरकम निवेश किया गया है, हालांकि बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर निवेशकों की नजर रिस्क और कर्ज के मैनेजमेंट पर बनी हुई है।
बाजार की चाल और कंपनी की रणनीति
NTPC के शेयरों में आई गिरावट को पब्लिक सेक्टर की एनर्जी कंपनियों के प्रति बदलते बाजार सेंटीमेंट के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी फिलहाल अपनी कैपेसिटी को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए जोरदार निवेश कर रही है। वर्तमान में 35.7 GW की कैपेसिटी पर काम चल रहा है, जो भविष्य की ग्रोथ के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश है।
कोयले से ग्रीन एनर्जी की ओर
कंपनी अब सिर्फ पारंपरिक कोयला आधारित बिजली तक सीमित नहीं रहना चाहती। रिन्यूएबल एनर्जी, न्यूक्लियर पावर और ग्रीन हाइड्रोजन पर कंपनी का विशेष फोकस है। लक्ष्य यह है कि फाइनेंशियल ईयर 2037 तक रिन्यूएबल कैपेसिटी को 136 GW तक पहुंचाया जाए। साथ ही, अपनी जॉइंट वेंचर कंपनी NPUNL के जरिए कंपनी अब न्यूक्लियर सेक्टर में भी कदम रख रही है ताकि कोयले पर निर्भरता कम की जा सके।
वैल्युएशन और रेगुलेटेड मॉडल
वैल्युएशन की बात करें तो शेयर अपने अनुमानित FY28 की कमाई के 10 गुना पर ट्रेड कर रहा है। कंपनी का रेगुलेटेड इक्विटी बेस ₹1,21,745 करोड़ का है, जो हर साल 9 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है। पावर सेक्टर में यह मॉडल एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, क्योंकि टैरिफ इसी निवेश पर तय किए जाते हैं, जो कमाई को एक स्थिरता देते हैं।
निवेश से पहले इन जोखिमों को समझें
इतने बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन में देरी और लागत बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। साथ ही, लगातार हो रहे निवेश के कारण डेट (Debt) का मैनेजमेंट कंपनी के लिए बड़ी चुनौती होगी। यदि बिजली की मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ती है, तो कंपनी की फाइनेंशियल सेहत पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में प्रोजेक्ट कमीशनिंग की टाइमलाइन, डिमांड में बदलाव और डेट मैनेजमेंट पर कड़ी नजर रखनी होगी।
