पावर सेक्टर की दिग्गज कंपनी NTPC ने रूस की Rosatom के साथ मिलकर **6** नए न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस **₹1.5 लाख करोड़** के मेगा प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत की क्लीन एनर्जी क्षमता को बढ़ाना है, लेकिन इसके लंबे कंस्ट्रक्शन टाइम और रेगुलेटरी चुनौतियों पर निवेशकों को ध्यान देना होगा।
न्यूक्लियर पावर में NTPC की नई पारी
NTPC ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 6,000 मेगावाट की न्यूक्लियर क्षमता जोड़ने का प्रस्ताव पेश किया है। कंपनी की योजना है कि रूस की Rosatom के साथ मिलकर VVER न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाए। इस साझेदारी के जरिए कंपनी सरकारी स्तर पर होने वाले समझौतों का लाभ उठाना चाहती है ताकि टेंडरिंग और बिडिंग की जटिलताओं से बचा जा सके। कंपनी ने पहले ही मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में संभावित साइट्स के लिए Atomic Energy Commission को अपनी योजना सौंप दी है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
अब तक NTPC मुख्य रूप से थर्मल (कोयला) और हाल के समय में रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर और विंड) पर ध्यान केंद्रित करती आई है। न्यूक्लियर एनर्जी में प्रवेश करना कंपनी के बिजनेस मॉडल में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। हालांकि न्यूक्लियर पावर से 24x7 बिजली मिलने का फायदा है, लेकिन इसके साथ कुछ बड़े जोखिम भी जुड़े हैं:
- भारी निवेश और समय: न्यूक्लियर प्लांट बनाने में बहुत बड़ा पूंजीगत व्यय (Capex) लगता है और इन्हें चालू होने में कई साल लगते हैं। यह कंपनी के कैश फ्लो और कर्ज पर दबाव डाल सकता है।
- रेगुलेटरी चुनौतियां: भारत में न्यूक्लियर पावर का काम मुख्य रूप से Nuclear Power Corporation of India (NPCIL) के पास रहा है। NTPC को इसमें कदम रखने के लिए कड़े रेगुलेटरी अप्रूवल और सरकारी मंजू़रियों से गुजरना होगा।
आने वाले समय में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार से मंजूरी कब मिलती है और इस ₹1.5 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट की फंडिंग स्ट्रक्चर क्या होगी। कंपनी कैसे अपने पुराने कोल बिजनेस और इस नए लंबे प्रोजेक्ट को बैलेंस करती है, यह शेयरहोल्डर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
