NTPC Share: भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर बड़ा दांव! न्यूक्लियर टेक में 'मेड इन इंडिया' पर जोर, हो सकती है थोड़ी महंगी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
NTPC Share: भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर बड़ा दांव! न्यूक्लियर टेक में 'मेड इन इंडिया' पर जोर, हो सकती है थोड़ी महंगी
Overview

NTPC के चेयरमैन गुरदीप सिंह ने भारत को अपनी परमाणु (Nuclear) टेक्नोलॉजी पर जोर देने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि भले ही शुरुआती लागत **5-10%** ज्यादा आए, लेकिन सप्लाई चेन के जोखिमों से बचने के लिए यह ज़रूरी है। यह भारत के **100 GW** परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का हिस्सा है।

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NTPC के चेयरमैन गुरदीप सिंह का मानना है कि भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करके अपनी घरेलू परमाणु (Nuclear) टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका सुझाव है कि अगर शुरुआती लागत 5-10% तक बढ़ भी जाती है, तो भी आत्मनिर्भरता हासिल करने और भविष्य के जोखिमों से बचने के लिए यह एक बेहतर कदम होगा। यह पहल भारत के 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के बड़े लक्ष्य के साथ जुड़ा है।

'मेक इन इंडिया' न्यूक्लियर पावर का आर्थिक पहलू

घरेलू टेक्नोलॉजी पर जोर देने के बावजूद, भारत के परमाणु ऊर्जा लक्ष्यों की लागत काफी अधिक है। अनुमान है कि भारत में प्रति मेगावाट (MW) परमाणु बिजली की लागत ₹15-16 करोड़ आती है, जो कि सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा परियोजनाओं की लागत ₹5-8 करोड़ प्रति MW से काफी ज्यादा है। 100 GW के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2047 तक हर साल लगभग 4.14 GW क्षमता जोड़नी होगी, जिसके लिए कुल $218 बिलियन के निवेश का अनुमान है।

SHANTI Act और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट

2025 में लागू हुए SHANTI Act (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) जैसे नए कानून, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्राइवेट और फॉरेन इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए लाए गए हैं। इस एक्ट के तहत, परमाणु प्रोजेक्ट्स में 49% तक फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की इजाजत है और लायबिलिटी रूल्स में भी सुधार किया गया है। हालांकि, कोयला, सौर और पवन ऊर्जा की तुलना में परमाणु ऊर्जा की आर्थिक व्यवहार्यता पर अभी भी सवाल बने हुए हैं।

बड़े रिएक्टर्स या स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs)?

NTPC बड़े क्षमता वाले रिएक्टरों को प्राथमिकता देता है, लेकिन सरकार छोटे और मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के विकास पर भी ध्यान दे रही है, जिसके लिए ₹20,000 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है। SMRs को तेजी से स्थापित किया जा सकता है और प्रति यूनिट उनकी शुरुआती लागत कम हो सकती है। हालांकि, लागत-प्रभावी होने के लिए इनकी बड़ी मात्रा में मांग की आवश्यकता होगी। भारत में L&T जैसी कंपनियां घरेलू निर्माण से SMRs की लागत में 30% तक की बचत का अनुमान लगा रही हैं। वैश्विक स्तर पर Westinghouse, EDF और Rosatom प्रमुख प्लेयर हैं, जबकि GE Hitachi SMR डिजाइन पर काम कर रहा है। भारत में NPCIL, Tata Power और L&T जैसी कंपनियां SMRs के अवसरों को तलाश रही हैं।

NTPC की मार्केट पोजीशन

एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के तौर पर NTPC की मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalisation) मई 2026 तक लगभग ₹3.83 ट्रिलियन थी, जिसका P/E रेशियो 15.43 से 16.3 के बीच रहा। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, NTPC के मूल्यांकन पर परमाणु ऊर्जा में इसकी रणनीतिक दिशा का असर पड़ेगा।

घरेलू परमाणु टेक्नोलॉजी के रिस्क

ऊर्जा सुरक्षा के उद्देश्य से घरेलू परमाणु टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता देने में आर्थिक जोखिम भी शामिल हैं। स्वदेशी समाधानों की उच्च प्रारंभिक लागत से प्रोजेक्ट की कुल लागत और बिजली की टैरिफ बढ़ सकती है, जिससे परमाणु ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा (Renewables) की तुलना में कम प्रतिस्पर्धी हो सकती है। पूरी तरह से घरेलू विकास पर निर्भर रहने से वैश्विक स्तर की तुलना में नवाचार (Innovation) की गति धीमी हो सकती है। SHANTI Act के तहत बदलते रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से निवेशकों के लिए कुछ अनिश्चितताएं भी पैदा हो सकती हैं। परमाणु प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक भारी पूंजी, जिसमें संभावित लागत वृद्धि भी शामिल है, एक बड़ा वित्तीय जोखिम पेश करती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.