Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) ने राजस्थान स्थित अपने 700 MW के RAPP-8 रिएक्टर में फ्यूल लोडिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह स्वदेशी रिएक्टर 16 प्रस्तावित यूनिट्स की सीरीज का चौथा हिस्सा है, जो भारत के पावर ग्रिड को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्वदेशी तकनीक और विस्तार
NPCIL ने 19 सितंबर को Atomic Energy Regulatory Board (AERB) से मंजूरी मिलने के बाद रावतभाटा साइट पर इस प्रोजेक्ट में फ्यूल लोडिंग की प्रक्रिया शुरू की। RAPP-8 एक 'प्रेसराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर' (PHWR) है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। सरकार की योजना देश भर में इसी 700 MW डिजाइन वाले 16 रिएक्टर तैनात करने की है, जिससे निर्माण की जटिलता और समय में कमी आएगी। इसके पहले काकरापार (गुजरात) और RAPP-7 जैसी इकाइयां पहले ही सफलतापूर्वक काम कर रही हैं।
निवेशकों और पावर सेक्टर पर असर
भले ही NPCIL एक लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन परमाणु ऊर्जा क्षमता का यह विस्तार पावर सेक्टर के लिए गेम चेंजर है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा 'बेसलोड पावर' के रूप में ग्रिड को स्थिरता प्रदान करती है। इस बड़े प्रोजेक्ट रोलआउट से घरेलू हैवी इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन फर्मों के लिए लंबे समय तक काम का रास्ता खुल गया है। भारत के 2047 तक 100 GWe परमाणु क्षमता हासिल करने के लक्ष्य से जुड़ी कंपनियों को लगातार ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद है।
रिस्क और आगे क्या?
परमाणु परियोजनाओं में तकनीकी जटिलता और सुरक्षा मानक बेहद कड़े होते हैं। निर्माण और कमीशनिंग के दौरान समय और बजट बढ़ने का रिस्क हमेशा बना रहता है। अब निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स की नजरें रिएक्टर के 'फर्स्ट अप्रोच टू क्रिटिकैलिटी' (जब चेन रिएक्शन शुरू होगा) पर टिकी हैं। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो यह यूनिट चालू फाइनेंशियल ईयर के अंत तक कमर्शियल पावर जनरेशन शुरू कर सकती है।
