Department of Atomic Energy ने NPCIL के तहत एक नई कंसल्टिंग सब्सिडियरी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर पावर सेक्टर में एंट्री लेने और लाइसेंसिंग व सुरक्षा के जटिल नियमों को समझने में मदद करना है।
न्यूक्लियर क्षमता का बढ़ता दायरा
भारत ने साल 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसमें से 54 GW की जिम्मेदारी सरकारी दिग्गज NPCIL के कंधों पर है, जबकि बाकी क्षमता के लिए सरकार अब नई प्राइवेट और पब्लिक कंपनियों का स्वागत कर रही है। यह प्रस्तावित कंसल्टिंग यूनिट इन नई कंपनियों के लिए एक ब्रिज (पुल) की तरह काम करेगी, जो डिजाइन और साइट सिलेक्शन जैसी चुनौतियों को आसान बनाएगी ताकि देश में PHWR (Pressurised Heavy Water Reactors) का विस्तार तेजी से हो सके।
SHANTI Act का असर
दिसंबर 2025 में आए 'SHANTI Act' ने देश में न्यूक्लियर पावर जनरेशन पर सरकारी एकाधिकार (monopoly) को खत्म कर दिया है। इससे प्राइवेट और विदेशी कंपनियों के लिए रास्ते खुल गए हैं, लेकिन इस सेक्टर की बारीकियां और कड़े अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक अभी भी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती हैं। नई सब्सिडियरी कंपनियों को लाइसेंस एप्लीकेशन तैयार करने और मेंटेनेंस की रणनीति बनाने में मदद करेगी, जो किसी भी प्रोजेक्ट की लंबी अवधि की सफलता के लिए जरूरी है।
रिस्क और चुनौतियां
इस पहल के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। SHANTI Act के तहत 'लायबिलिटी फ्रेमवर्क' और न्यूक्लियर एक्सीडेंट के मामले में मुआवजे के नियम अभी भी चर्चा का विषय हैं। साथ ही, चुनौती यह भी है कि NPCIL खुद अपने बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। ऐसे में यह देखना होगा कि नई कंसल्टिंग यूनिट बनाने से NPCIL के मुख्य कामकाज पर कोई असर न पड़े और टैलेंट का सही इस्तेमाल हो सके।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
रिटेल निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि NPCIL एक 100% सरकारी कंपनी है और यह NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। हालांकि कंपनी अपने बॉन्ड्स के जरिए मार्केट से फंड जुटाती है, लेकिन इसके शेयर आप सीधे नहीं खरीद सकते। यह खबर शेयर बाजार की तुलना में एनर्जी सेक्टर के बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है।
