IPO की तैयारी और सरकारी मदद में कटौती
डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (Department of Atomic Energy) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए NPCIL को इक्विटी सपोर्ट (Equity Support) घटाकर ₹100 करोड़ कर दिया है। यह पिछले ₹3,042 करोड़ से भारी कटौती है। इस बजट शिफ्ट का मतलब है कि अब NPCIL को अपनी कैपिटल (Capital) की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी पैसों के बजाय पब्लिक मार्केट की ओर देखना होगा। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी का कुल कैपिटल आवंटन भी ₹11,977 करोड़ से घटकर ₹9,966 करोड़ हो गया है, जिसका मुख्य कारण NPCIL के लिए इक्विटी सपोर्ट में कमी है। यह कदम भारत के 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर कैपेसिटी (Nuclear Capacity) के लक्ष्य के साथ तालमेल बिठाता है, जिसके लिए सरकारी फंड से परे बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।
रेवेन्यू बढ़ा, पर मुनाफे में गिरी NPCIL
NPCIL, जो भारत का एकमात्र न्यूक्लियर पावर प्लांट ऑपरेटर है, के पास 24 फैसिलिटीज और 8,780 MW कैपेसिटी है। कंपनी ने 2024-25 में 56,881 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया, जो पिछले साल के 47,971 मिलियन यूनिट से काफी ज्यादा है। इस उत्पादन बढ़ोतरी का सीधा असर रेवेन्यू पर पड़ा, जो बढ़कर ₹19,880 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, ₹10,904 करोड़ की प्रोडक्शन कॉस्ट पर ₹8,976 करोड़ का ऑपरेटिंग सरप्लस (Operating Surplus) होने के बावजूद, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में एक तिहाई की भारी गिरावट आई, जो ₹4,343 करोड़ पर आ गया। यह प्रॉफिट का सिकुड़ना मुख्य रूप से भारी फाइनेंसिंग कॉस्ट (Financing Costs), डेप्रिसिएशन (Depreciation) और अन्य नॉन-ऑपरेटिंग खर्चों के कारण है।
संसदीय समिति का ऑडिट का दबाव
एक संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) ने रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिट कॉन्ट्रैक्शन के बीच इस बड़े अंतर को "गंभीर चिंता का विषय" बताया है। समिति ने सरकार से NPCIL के कॉस्ट स्ट्रक्चर (Cost Structure) का एक स्वतंत्र परफॉर्मेंस ऑडिट (Performance Audit) कराने की पुरजोर सिफारिश की है। यह मांग कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता (Financial Transparency) और सार्वजनिक निवेशकों के आकर्षण पर सवाल उठा सकती है, भले ही NPCIL के बॉन्ड्स (Bonds) को 'AAA' की मजबूत क्रेडिट रेटिंग मिली हुई हो। समिति के हस्तक्षेप से यह संकेत मिलता है कि रिपोर्ट किए गए रेवेन्यू आंकड़ों से परे गहरी वित्तीय जांच की आवश्यकता है।
वैल्यूएशन की चुनौती और पीयर कंपैरिजन
चूंकि NPCIL एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) है जो सीधे लिस्टेड नहीं है, इसलिए P/E रेशियो (P/E Ratio) और मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalisation) जैसे सीधे आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, NTPC Ltd जैसे लिस्टेड पीयर्स (Listed Peers) के साथ तुलना की जाए तो NTPC, भारत की सबसे बड़ी पावर यूटिलिटी, का P/E रेशियो लगभग 14.4x से 16.7x के बीच है और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹3.49 ट्रिलियन है। NPCIL के लिए IPO में अपनी वैल्यूएशन को सही ठहराना एक चुनौती होगी, खासकर तब जब उसकी एसेट्स (Assets) और जनरेशन कैपेसिटी (Generation Capacity) अच्छी है, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) में दिक्कतें हैं। समिति के कॉस्ट ऑडिट की मांग से निवेशकों द्वारा इन मुद्दों पर गहन जांच की जा सकती है, जो NPCIL की इक्विटी के बाजार मूल्य को प्रभावित कर सकता है।
आगे के जोखिम: छुपी लागतें और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन
ऑपरेटिंग सरप्लस का एक बड़ा हिस्सा फाइनेंसिंग कॉस्ट और डेप्रिसिएशन में चला जाना चिंता का विषय है। FY 2024-25 में, इन नॉन-ऑपरेशनल खर्चों और फाइनेंसिंग कॉस्ट ने ऑपरेटिंग सरप्लस का 55% से ज्यादा हिस्सा सोख लिया। इसके अलावा, NPCIL के पास 4800 MW का बड़ा कंस्ट्रक्शन पाइपलाइन (Construction Pipeline) है, जिसमें RAPS 7 & 8 और KKNPP 3 & 4 जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए अगले कुछ सालों में ₹18,000-20,000 करोड़ के सालाना कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) की जरूरत होगी। प्रोजेक्ट्स में देरी या लागत बढ़ने से कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य के मुनाफे पर और अधिक दबाव पड़ सकता है, जो IPO की सफलता और उसके बाद के मार्केट परफॉर्मेंस के लिए एक जोखिम पैदा करता है।
IPO का रास्ता: ऑडिट नतीजे तय करेंगे निवेशक का भरोसा
NPCIL का IPO, महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय न्यूक्लियर एनर्जी लक्ष्यों और प्राइवेट कैपिटल की बढ़ती जरूरत के बीच आ रहा है। हाल की पॉलिसी मूव्स (Policy Moves) जैसे SHANTI Act का पास होना और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (Small Modular Reactors) के लिए बजट आवंटन, भारत के एनर्जी मिक्स में न्यूक्लियर की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं। अब सारा फोकस स्वतंत्र ऑडिट के नतीजों पर रहेगा। अगर ऑडिट में लागत नियंत्रण (Cost Control) की बड़ी समस्याएं सामने आती हैं, तो IPO की प्राइसिंग (Pricing) और निवेशक की रुचि प्रभावित हो सकती है। हालांकि कंपनी का ऑपरेशनल रिकॉर्ड मजबूत है, लेकिन पब्लिक मार्केट से अच्छा फंड जुटाने के लिए उसे स्थिर मुनाफे की स्थिति दिखानी होगी।