सरकारी माइनिंग कंपनी NMDC ने अब कोयला क्षेत्र में विस्तार की तैयारी कर ली है। कंपनी अक्टूबर-दिसंबर **2026** की तिमाही से झारखंड स्थित टोकिसुड नॉर्थ खदान से कमर्शियल आधार पर कोयला बेचना शुरू करेगी।
भारत की सबसे बड़ी आयरन ओर उत्पादक कंपनी NMDC अब अपनी निर्भरता कम करने के लिए कोयले की दुनिया में उतरने को तैयार है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि झारखंड की टोकिसुड नॉर्थ खदान से कमर्शियल सप्लाई का सिलसिला साल 2026 की आखिरी तिमाही से शुरू हो जाएगा।
बड़ा लक्ष्य और रणनीति
NMDC ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के अंत तक 10 लाख टन थर्मल कोल बेचने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कंपनी का विजन साफ है—साल 2030 तक अपने कुल रेवेन्यू का 20% हिस्सा आयरन ओर के अलावा अन्य मिनरल्स से प्राप्त करना। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए कंपनी रोहने कोकिंग कोल ब्लॉक पर भी काम कर रही है, जहां से उत्पादन 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। यह कदम घरेलू स्टील मेकर्स के लिए बहुत मददगार साबित होगा।
मजबूत फाइनेंशियल नींव
कंपनी के पास इस विस्तार को फंड करने के लिए पर्याप्त पूंजी है। हालिया फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी ने ₹31,554 करोड़ का रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज किया है। इतना ही नहीं, NMDC 2030 तक आयरन ओर की उत्पादन क्षमता को 10 करोड़ टन सालाना तक ले जाने की तैयारी में है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
हालांकि, कोल माइनिंग में उतरना कंपनी के लिए नई चुनौतियां भी ला सकता है। ग्लोबल मार्केट में कोयले की कीमतों में उतार-चढ़ाव (Price Volatility), प्रोजेक्ट्स में देरी और सख्त पर्यावरणीय नियम निवेशकों के लिए रिस्क पैदा कर सकते हैं। कंपनी कितनी कुशलता से अपनी माइनिंग ऑपरेशंस को मैनेज करती है, इसी पर आने वाले समय में स्टॉक का प्रदर्शन निर्भर करेगा।
