NMDC का बड़ा ग्रीन रोडमैप: 2047 तक 'नेट जीरो' का लक्ष्य, निवेश पर पड़ेगा ये असर

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
NMDC का बड़ा ग्रीन रोडमैप: 2047 तक 'नेट जीरो' का लक्ष्य, निवेश पर पड़ेगा ये असर

सरकारी कंपनी NMDC ने साल 2047 तक 'नेट जीरो' ऑपरेशनल एमिशन हासिल करने का मल्टी-फेज प्लान पेश किया है। इस रणनीति में रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड पर फोकस है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर रहने वाली है।

सरकारी माइनिंग कंपनी NMDC ने अपने डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonisation) का रोडमैप तैयार कर लिया है। कंपनी का लक्ष्य 2047 तक नेट जीरो ऑपरेशनल एमिशन तक पहुंचना है। इस प्लान में स्कोप 1 और स्कोप 2 एमिशन को कवर किया गया है, जिसे मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से 3 चरणों में लागू किया जाएगा। कंपनी का इरादा ऑपरेशनल एमिशन को कम से कम 90% तक घटाने का है।

क्या है कंपनी की तैयारी?

कंपनी अपने माइनिंग इक्विपमेंट को इलेक्ट्रिक मोड पर शिफ्ट कर रही है और लो-कार्बन फ्यूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रही है। फिलहाल NMDC 10.5 MW की विंड फैसिलिटी चित्तदुर्ग में चला रही है और अपनी सभी माइनिंग साइट्स पर सोलर पावर को इंटीग्रेट कर रही है।

स्लरी पाइपलाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर

रणनीति का एक अहम हिस्सा 'स्लरी पाइपलाइन प्रोजेक्ट' है। हालांकि इसमें बड़ा कैपिटल इन्वेस्टमेंट शामिल है, लेकिन इससे रोड ट्रांसपोर्ट की जगह पाइपलाइन और रेल के जरिए मिनरल ढोने से कार्बन एमिशन में बड़ी कमी आएगी।

निवेशकों के लिए जरूरी बात

इन्वेस्टर्स के लिए चुनौती इस भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट को मैनेज करने की होगी। चूंकि कंपनी का प्रॉफिट आयरन ओर (Iron Ore) की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर निर्भर है, इसलिए इस ग्रीन बदलाव का बैलेंस शीट पर दबाव देखना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य में स्लरी पाइपलाइन की गति और रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाने की रफ्तार ही शेयरहोल्डर्स के लिए सबसे बड़े मॉनिटरेबल (Monitorable) पॉइंट्स होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.