NLC India की सब्सिडियरी कंपनी NLC India Renewables ने पश्चिम बंगाल में **50 MW/200 MWh** का बैटरी स्टोरेज कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। ग्रीन एनर्जी की तरफ यह कंपनी का बड़ा कदम है, लेकिन निवेशकों के मन में अभी भी ऊंचे कर्ज (Debt) और कम मार्जिन को लेकर चिंता बनी हुई है।
सरकारी पावर प्रोड्यूसर NLC India की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी NLC India Renewables को यह कॉन्ट्रैक्ट पश्चिम बंगाल के आरामबाग और हुगली में एक स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) विकसित करने के लिए मिला है। यह प्रोजेक्ट वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (WBSEDCL) द्वारा आयोजित टेंडर प्रक्रिया के जरिए हासिल किया गया है। यह कदम कंपनी के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह माइनिंग और थर्मल पावर के अपने पारंपरिक बिजनेस से आगे बढ़कर रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो को विविधता दे रही है।
ग्रिड की मजबूती में बड़ी भूमिका
भारत के पावर सेक्टर में बैटरी स्टोरेज की भूमिका काफी अहम हो गई है। विंड और सोलर पावर की अनिश्चितता को मैनेज करने के लिए 200 MWh की स्टोरेज कैपेसिटी ग्रिड को स्थिरता प्रदान करेगी। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपने रिन्यूएबल पोर्टफोलियो में भारी इजाफा करना है। फिलहाल, 14 अक्टूबर, 2026 को शेयर ₹257.10 पर बंद हुआ था।
निवेश के रिस्क और चुनौतियां
कंपनी के लिए सब कुछ आसान नहीं है। NLC India का Debt-to-EBITDA रेशियो करीब 5.64x के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, जो भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को कम कर सकता है। इसके अलावा, बैटरी स्टोरेज सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा (Competition) के चलते मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी बढ़ते कर्ज के बीच इन प्रोजेक्ट्स को बिना लागत बढ़ाए और तय समय पर कैसे पूरा करती है।
