NLC India रिन्यूएबल सेक्टर में अपनी धाक जमाने की तैयारी में है। कंपनी ने **2030** तक **10 GW** कैपेसिटी हासिल करने का रोडमैप तैयार किया है, जिसके लिए तमिलनाडु और ओडिशा में नए पंप-हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है।
रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बड़ा कदम
NLC India अब कोयले पर निर्भरता कम कर ग्रीन एनर्जी की तरफ तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल कंपनी की रिन्यूएबल कैपेसिटी 1.8 GW है, जिसे साल 2030 तक 10 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस रणनीति का मुख्य हिस्सा तमिलनाडु और ओडिशा में बन रहे 'पंप-हाइड्रो' प्रोजेक्ट्स हैं। यह एक बड़े बैटरी बैकअप की तरह काम करेंगे, जो ग्रिड को स्टेबिलिटी देने में मदद करेंगे।
टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन पर फोकस
पावर जनरेशन के अलावा, कंपनी नई तकनीकों में भी निवेश कर रही है। नेवेली (Neyveli) में 4 MW का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्लांट शुरू किया गया है। साथ ही, कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी के लिए कंपनी ने IIT मद्रास के साथ साझेदारी की है।
क्रिटिकल मिनरल में एंट्री
सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए NLC India ने छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों में वैनेडियम, टाइटेनियम और लाइमस्टोन जैसे मिनरल्स के लिए लाइसेंस सुरक्षित किए हैं। साथ ही, विदेशी प्रोजेक्ट्स के लिए KABIL के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
हालांकि यह बदलाव कंपनी के भविष्य के लिए अच्छा है, लेकिन ये प्रोजेक्ट्स काफी कैपिटल-इंटेंसिव हैं। इन बड़े प्रोजेक्ट्स में लागत बढ़ने और देरी होने का रिस्क बना रहता है। सरकारी कंपनी होने के नाते, पॉलिसी में बदलाव और रेगुलेटरी मंजूरी का असर भी कंपनी की बैलेंस शीट पर दिख सकता है। निवेशकों को कंपनी के कर्ज और प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए।
