सिक्किम में NHPC के 500 MW Teesta Stage VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में एक बड़ा हादसा हुआ है। एक एक्सेस टनल में मीथेन गैस के धमाके से 22 लोगों की जान चली गई। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पहले भी इस प्रोजेक्ट में भूगर्भीय जोखिमों को लेकर चेतावनी दी गई थी।
Detailed Coverage
सिक्किम में NHPC के निर्माणाधीन Teesta Stage VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। प्रोजेक्ट की एक टनल में मीथेन गैस के जोरदार धमाके के कारण कम से कम 22 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। यह हादसा 20 जुलाई को एडिटर 3 नामक एक सेकेंडरी टनल में हुआ, जिसका इस्तेमाल खुदाई के लिए किया जा रहा था।
फिलहाल, बचाव और राहत कार्य जारी हैं, लेकिन पहाड़ी टनल के अंदर पानी भरने और गैस के और भी पॉकेट होने के खतरे को देखते हुए यह काम काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
प्रोजेक्ट और भूगर्भीय जोखिम
Teesta Stage VI प्रोजेक्ट 500 MW का एक रन-ऑफ-द-रिवर पावर प्रोजेक्ट है, जिसे NHPC द्वारा विकसित किया जा रहा है। इस तरह के प्रोजेक्ट्स में, नदियों के पानी को पावर टरबाइन तक पहुंचाने के लिए टनल का निर्माण बेहद जरूरी होता है।
आपको बता दें कि हादसे से कुछ समय पहले जारी किए गए एक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जैसे दस्तावेजों में भी इस प्रोजेक्ट एरिया में मुश्किल भूगर्भीय परिस्थितियों का जिक्र किया गया था। इसमें खास तौर पर मीथेन गैस के संभावित खतरे की चेतावनी दी गई थी। पहले के जियोलॉजिकल मैपिंग में भी धमाका स्थल से 2 किलोमीटर के दायरे में मीथेन गैस निकलने की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे यह साफ है कि इस जोखिम के बारे में प्रोजेक्ट प्लानर्स को जानकारी थी।
सुरक्षा चिंताएं और देरी का इतिहास
यह घटना हिमालय जैसे जोखिम भरे इलाकों में चल रहे कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन पर सवाल खड़े करती है। CSIR-Central Institute of Mining and Fuel Research की रिसर्च के अनुसार, फाइलाइटिक रॉक फॉर्मेशन में मीथेन गैस को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए वेंटिलेशन, लगातार गैस मॉनिटरिंग और आवश्यक डाइल्यूशन पीरियड का सख्ती से पालन करना होता है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या हादसे के वक्त ये सुरक्षा उपाय पूरी तरह से लागू थे।
सुरक्षा के अलावा, Teesta Stage VI प्रोजेक्ट पहले से ही कई सालों की देरी का सामना कर रहा है। मूल रूप से 2012 में इसे चालू करने का लक्ष्य था, लेकिन पिछले कुछ सालों में इसे कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इनमें फॉरेस्ट क्लीयरेंस, 2011 के भूकंप का असर और अप्रत्याशित भूगर्भीय समस्याएं शामिल हैं। इन देरी के कारण प्रोजेक्ट की लागत और कंप्लीशन टाइमलाइन पर असर पड़ता रहा है।
निवेशकों के लिए खास बातें
शेयरधारकों के लिए, फिलहाल सबसे अहम होगा बचाव कार्यों की प्रगति और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर होने वाली आधिकारिक जांच के नतीजे। इंसानी जान के नुकसान के अलावा, निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि कहीं साइट पर काम रुकने से प्रोजेक्ट के कमीशनिंग शेड्यूल में और देरी तो नहीं होगी। NHPC जैसी बड़ी सरकारी पावर कंपनी के लिए, यह क्षमता साबित करनी होगी कि वह रेगुलेटरी जांच से कैसे निपटती है और साइट की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करती है। इससे कंपनी के लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल और फाइनेंशियल हेल्थ का अंदाजा लगाया जा सकेगा। बाजार प्रबंधन से प्रोजेक्ट की रिवाइज्ड टाइमलाइन और साइट को सुरक्षित करने के लिए जरूरी अतिरिक्त पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर भी कमेंट्री का इंतजार करेगा।
