मुनाफे के पीछे का गणित: रेगुलरटरी डेफरल्स का बड़ा खेल
NHPC के तीसरी तिमाही के नतीजों में 38.7% की जोरदार बढ़ोतरी का श्रेय मुख्य रूप से ₹437.14 करोड़ के 'रेगुलेटरी डेफरल अकाउंट बैलेंस' को जाता है। इसके बिना, कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट असल में काफी कम होता। यदि इन डेफरल्स को हटा दें, तो कंपनी का EPS (Earnings Per Share) पिछले साल के ₹0.20 की तुलना में इस बार ₹(0.95) के नेगेटिव में चला गया।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस में नरमी, मार्जिन्स पर दबाव
जहां प्रॉफिट रेगुलरटरी एडजस्टमेंट की वजह से बढ़ा, वहीं कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस में नरमी देखी गई। तिमाही के अंत में 31 दिसंबर, 2025 तक, रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 2.9% की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹2,220.73 करोड़ रहा। प्रॉफिटेबिलिटी भी प्रभावित हुई, ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर 26.38% रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 33.62% था।
स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही रही। रेवेन्यू 4.7% घटकर ₹1,877.47 करोड़ पर आ गया, लेकिन प्रॉफिट 7.0% बढ़कर ₹292.87 करोड़ दर्ज हुआ। इस बढ़ोतरी में भी ₹1,137.47 करोड़ के रेगुलेटरी डेफरल अकाउंट बैलेंस का बड़ा हाथ रहा। स्टैंडअलोन EPS भी इन डेफरल्स के बिना ₹(0.84) रहा, जबकि पिछले साल यह ₹0.25 था। ऑपरेटिंग मार्जिन भी गिरकर 19.35% हो गया।
हालांकि, नौ महीने (Nine Months) के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिक्चर थोड़ी बेहतर है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 9.4% बढ़कर ₹7,587.01 करोड़ और प्रॉफिट 4.6% बढ़कर ₹2,290.26 करोड़ रहा। कंसोलिडेटेड लेवल पर भी रेवेन्यू 9.5% की बढ़ोतरी के साथ ₹8,799.76 करोड़ और प्रॉफिट 24.1% की बढ़ोतरी के साथ ₹2,671.04 करोड़ दर्ज किया गया।
डिविडेंड का ऐलान, लेकिन कर्ज बढ़ता हुआ
इन नतीजों के साथ, कंपनी के बोर्ड ने 14% (यानी ₹1.40 प्रति इक्विटी शेयर) का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) भी घोषित किया है। लेकिन, निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता कंपनी पर बढ़ता कर्ज है। स्टैंडअलोन डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) सुधरकर 1.05 पर पहुंच गया है, जो पिछले साल दिसंबर में 0.93 था। वहीं, कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेश्यो भी 1.17 पर पहुंच गया है, जो पिछले साल 0.96 था। यह दर्शाता है कि कंपनी कर्ज पर अधिक निर्भर हो रही है।
प्रोजेक्ट्स और स्ट्रैटेजिक मूव्स
NHPC ने इस दौरान कई प्रोजेक्ट्स सफलतापूर्वक चालू किए हैं, जिनमें 800 MW का पार्वती-II, 300 MW का कर्णसार सोलर और 2000 MW के सुबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट की यूनिट्स शामिल हैं। 1 फरवरी, 2026 को सुबनसिरी लोअर का दूसरा यूनिट भी चालू हो गया। वहीं, कंपनी ने ओडिशा में GEDCOL के साथ फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए हुए MoU को रद्द करने का भी फैसला किया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैनेजमेंट की ओर से भविष्य के प्रदर्शन को लेकर कोई स्पष्ट फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking Guidance) नहीं दिया गया है, जिससे निवेशकों के लिए आगे की रणनीति पर विचार करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
